जगराओं में महिला टीचर को टॉर्चर: फ्रेंडशिप से मना करने पर तेजाब की धमकी!

लुधियाना के जगराओं स्थित एक निजी स्कूल में एक महिला शिक्षिका के साथ एक युवक द्वारा लगातार उत्पीड़न का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता ने वाल्मीकि सिंह उर्फ ग्रिड, निवासी गांव नत्थोवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस से मदद मांगी है। महिला शिक्षिका का दावा है कि यह युवक पिछले दो वर्षों से उसे परेशान कर रहा है और जबरदस्ती दोस्ती की कोशिश कर रहा है। मामला तब और बढ़ गया जब 5 सितंबर 2022 को आरोपी ने उसे जगराओं में घेर लिया, उसके टिफिन और पर्स को छीन लिया और उसे तथा उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

इस मामले में पंचायत भी बुलाई गई थी, जहां एक फैसला लिया गया, लेकिन आरोपी को कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने अपनी हरकतें जारी रखीं। पीड़िता ने बताया कि 28 अक्टूबर से 13 नवंबर 2024 के बीच आरोपी ने उसके पिता को बार-बार फोन और मैसेज भेज कर परेशान किया। शिक्षिका ने आगे कहा कि जब वह स्कूल जाती है या घर से बाहर निकलती है, तो यह युवक उसका पीछा करता है और उसे अपहरण करने तथा तेजाब फेंकने की धमकी देता है।

थाना हठूर के एएसआई बलजिंदर सिंह ने बताया कि यह महिला शिक्षिका, जो मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं, गांव झोरड़ा के एक स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। इसी बिच, 1 दिसंबर 2024 को आरोपी ने फिर से पीड़िता के पिता के मोबाइल पर फोन कर गालियां दीं, जो उसके दुष्कर्मों की चौंकाने वाली निरंतरता को दर्शाता है।

पुलिस ने आरोपी की हरकतों को गंभीरता से लेते हुए उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अपराधी अपने कृत्य से न केवल महिला की मानसिक शांति को भंग कर रहा है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों के लिए भी मुसीबत का कारण बन रहा है। यह मामला विभिन्न स्तरों पर समाज में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह उत्पीड़न की समस्या को उजागर करता है, जो कई महिलाएं आजकल सामना कर रही हैं।

महिला शिक्षिका ने उम्मीद जताई है कि पुलिस जांच को गंभीरता से लेगी और उसे न्याय मिलेगा। समाज में ऐसी घटनाएं न केवल महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि हमें मिलकर ऐसे मामलों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें और उनके प्रति कोई भी दुर्व्यवहार सहन योग्य नहीं है।

इस मामले ने समाज में उत्पीड़न और महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा को फिर से गरम कर दिया है, और सभी की नजरें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। पुलिस की सक्रियता और समाज के सहयोग से ही इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम संभव है।