ज्योतिर्मठ शङ्कराचार्य ने किया सनातन संरक्षण परिषद् का गठन
महाकुंभनगर, 12 जनवरी (हि.स.)। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामि अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती की मौजूदगी में आज परम धर्म संसद में सनातन संरक्षण परिषद का गठन हुआ। इस मौके पर संसद में उत्तराखण्ड की बदरीश गाय का आगमन हुआ, जिससे परमधर्म संसद और भी पवित्र हो गई। सनातन धर्म के अनुसार गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है और आज सत्र को 33 करोड़ देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिल गया। बाहर इन्द्रदेव भी वर्षा कर अपना आशीर्वाद दे रहे थे।
जयोद्घोष के साथ परमधर्म संसद का सत्र शुरू हुआ। प्रश्नकाल में धर्मांसदों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का उत्तर परमाराध्य ने दिया। धर्मांसद डाॅ. मनीष तिवारी कौशांबी ने सनातन संरक्षण परिषद गठित करने का प्रस्ताव रखा। देवेन्द्र पांडेय ने कहा कि धर्माचार्यों का नियंत्रण धर्मस्थलों में नहीं होने के कारण आज सभी मंदिरों पर सरकार ने कब्जा कर लिया है।
संसद सत्र में ही साध्वी पूर्णाम्बा व नरोत्तम पारीक ने साप्ताहिक पत्र जय ज्योतिर्मठ का विमोचन परमाराध्य के कर-कमलों से कराया। संजय जैन को गौ प्रतिष्ठा ध्वज स्थापना का संरक्षक बनाया गया। गुजरात में सभी जिलों में गो प्रतिष्ठा ध्वज स्थापना की जिम्मेदारी दी गई।
परमाराध्य ने कहा कि हिन्दू धर्म अपने धर्मस्थानों-मठों-मन्दिरों-गुरुकुलों-गोशालाओं आदि से अनुप्राणित होता है। इसलिए इन हिन्दू धर्मस्थलों की देखभाल और प्रबन्धन का सीधा प्रभाव हिन्दू धर्म के मानने वालों और उनके प्रति धारणा बनाने वालों पर पड़ता है। इसलिए आवश्यक है कि इनके संरक्षण और प्रबन्धन में लगे लोग सनातन धर्म की न केवल गहरी जानकारी रखते हों अपितु अपेक्षित है कि वे हिन्दू धर्म को जी रहे हों और उनकी गहरी अनुभूति से भी सम्पन्न हों। परन्तु वर्तमान में देखा जा रहा है कि अनेक हिन्दू धर्मस्थलों की व्यवस्था को सरकार अपने धर्मनिरपेक्ष अधिकारियों के माध्यम से संभालने लगी है और यत्र-तत्र तो अन्य धर्म के लोगों को भी इस कार्य में लगा दिया है।