मोहाली: वकील के बेटे पर कुत्ते का हमला, डर के कारण पार्किंग बंद!

मोहाली के फेज-2 इलाके में एक 11 वर्षीय बच्चे पर आवारा कुत्ते के हमले की घटना ने क्षेत्र के निवासियों को चिंतित कर दिया है। यह बच्चा, जो स्थानीय निवासी है, चंडीगढ़ के सेक्टर-16 के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। इस दुर्दांत घटना के बाद, पीड़ित बच्चे के परिजनों ने फेज-1 पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई और अधिकारियों से अनियंत्रित आवारा कुत्तों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। उनके अनुसार, संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण स्थिति इस हद तक बिगड़ चुकी है।

बच्चे के पिता, अतुल शर्मा, ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुत्तों के मुद्दे को हल्के में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम हर साल आवारा कुत्तों के मामले में करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन फिर भी कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इन आवारा कुत्तों के डर से बच्चे अब घरों से बाहर खेलने नहीं निकल पा रहे। अतुल शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बच्चों को पार्क में भेजना बंद कर दिया है, जिससे उनके बच्चों की खेलने की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।

इस मामले में केवल फेज-2 का बच्चा ही नहीं, बल्कि इससे पहले जीरकपुर में एक और घटना हुई थी जिसमें एक अन्य बच्चा दुकानों पर सामान खरीदने के दौरान आवारा कुत्ते के हाथों घायल हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस दिन करीब दस लोग कुत्ते के हमले का शिकार हुए थे। ये घटनाएँ समाज में सुरक्षा की गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं, और नागरिकों का मानना है कि नगर निगम को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने इन घटनाओं की बढ़ती संख्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के लिए ठोस उपाय किए जाएं। इसके अंतर्गत कुत्तों के लिए सुरक्षित और उचित आश्रय की व्यवस्था, नसबंदी कार्य और जागरूकता अभियान शामिल होना चाहिए। ऐसे उपाय न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे बल्कि आवारा कुत्तों की स्थिति को भी सुधारने में मदद करेंगे।

इस संकट के समाधान के लिए नागरिकों को मिलकर आवाज उठाने की आवश्यकता है। उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना होगा और प्रशासन से अपेक्षित कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास करते रहना होगा। यदि ऐसे कदम उठाए जाएं, तो निश्चित रूप से मोहाली में आवारा कुत्तों की समस्या को कम किया जा सकता है, और बच्चों की खेलकूद की आजादी को पुनः स्थापित किया जा सकता है।