हिन्दू और जैन धर्म दोनों में होते हैं नागा साधू : सतीश राय

हिन्दू और जैन धर्म दोनों में होते हैं नागा साधू : सतीश राय

-अनगिनत रहस्यों से भरा होता है इनका जीवन

महाकुम्भनगर, 12 जनवरी (हि.स.)। हिन्दू धर्म और जैन धर्म दोनों में नागा साधू होते हैं। हिन्दू धर्म में नागा साधू शैव सम्प्रदाय से सम्बंधित होते हैं और भगवान शिव के उपासक होते हैं। जबकि जैन धर्म में नागा साधू दिगम्बर सम्प्रदाय से होते हैं। जैन नागा साधू भी निर्वस्त्र रहते हैं। लेकिन यह अपने शरीर पर भस्म या राख नहीं लगाते। यह अहिंसक और आत्म नियंत्रण के सिद्धांतों का पालन करते हुए मोक्ष प्राप्त करने के लिए साधना और तपस्या करते हैं।

यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान के स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने महाकुम्भ मेला के सेक्टर 10 में स्थित अपने शिविर में कही। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को नागा साधू के बारे में गलतफहमियां ज्यादा हैं। युवा पीढ़ी नागा साधू के बारे में नहीं जानती। नागा साधुओं का जीवन अनगिनत रहस्यों से भरा होता है। नागा साधू अपनी तपस्वी जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं। कुम्भ के बाद कई नागा साधू हिमालय के जंगलों या अन्य शांत एवं एकांत स्थलों पर जाकर साधना और तप करते हैं।

नागा साधु कड़ाके की ठंड में भी रहते हैं निर्वस्त्र

सतीश राय ने कहा कि कुम्भ और महाकुम्भ के दौरान कड़ाके की ठंड में भी यह नागा साधु निर्वस्त्र रहते हैं। उनकी जिंदगी बेहद कठिन होती है। उन पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात उनके द्वारा घोर तपस्या स्वरूप उनके शरीर पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ये अपने शरीर को गलाकर ऐसे हठयोग करते हैं, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।

प्राकृतिक औषधियों का होता है ज्ञान

नागा साधुओं को प्राकृतिक औषधियां और जड़ी बूटियों का अच्छा ज्ञान होता है। यह प्रकृति और प्राकृतिक अवस्था को महत्व देते हैं। इसीलिए यह निर्वस्त्र रहते हैं। इनका मानना है कि इंसान जन्म लेता है तो वह निर्वस्त्र ही इस दुनिया में आता है, यही अवस्था प्राकृतिक होती है।

धर्म रक्षक के रूप में जाने जाते हैं

उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा में नागा शब्द का अर्थ पहाड़ होता है। कछारी भाषा में नागा का अर्थ युवा बहादुर सैनिक अर्थात नागा साधू को योद्धा सन्यासी भी कहते हैं। ये आदि शंकराचार्य मठ से जुड़े होते हैं। सनातन धर्म की रक्षा के लिए इनकी उत्पत्ति हुई थी। जिन्हें शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों का भी ज्ञान था। इसीलिए धर्म रक्षक के रूप में सम्मान देने के लिए राजाओं ने इन्हें सबसे पहले शाही स्नान करवाने की परम्परा शुरू की जो आज भी कायम है।

सनातन धर्म की रक्षा के लिए लड़ते हैं युद्ध

उन्होंने बताया कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए नागा साधु और औरंगजेब की सेना के बीच हुए युद्ध का प्रमाण कुछ किताबों में उल्लेखित है। जिसमें मुगलों की हार हुई थी। भारत द्वारा आधुनिकता शैली अपनाये जाने के कारण नागा साधुओं की फौज बिखर गई।

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