अस्पताल में महिला की मौत पर बवाल: साइलेंट अटैक या डॉक्टरों की लापरवाही?

लुधियाना के बाबा थान सिंह चौक पर स्थित अरोड़ा नर्सिंग होम के बाहर आज सुबह से कुछ लोगों ने जोरदार हंगामा किया। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक महिला, जिनका नाम कीर्ति था, का इलाज के दौरान निधन हो गया। हंगामे में शामिल लोगों ने न केवल अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए, बल्कि मृतक महिला के परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी माँ की उचित देखभाल नहीं की गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना डिवीजन नंबर 3 की पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया।

मृतक महिला कीर्त‍ि के बेटे, लाल बहादुर ने बताया कि उनकी मां को पित्त की पथरी थी, इसलिए उन्होंने उसे गांव से शहर लाकर अरोड़ा नर्सिंग होम में भर्ती कराया। ऑपरेशन से पहले उनकी मां का रक्तचाप (बीपी) बढ़ गया था, जिसके बारे में डॉक्टरों ने कहा था कि ग्लूकोज चढ़ाने के बाद जब बीपी स्थिर होगा, तभी ऑपरेशन किया जाएगा। ऑपरेशन के लिए कुल 35 हजार रुपये का खर्च बताया गया था लेकिन शुरू में उन्हें 10 हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा गया। ऑपरेशन सफलतापूर्वक हुआ, लेकिन इसके बाद रात 3 बजे कीर्ति की सांस फूलने लगी।

जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो लाल बहादुर की बहन ने हड़बड़ाते हुए आकर कहा कि उनकी मां अब हिल नहीं रही हैं। तत्काल डॉक्टरों को सूचित किया गया, लेकिन सुबह 4:30 बजे तक कोई डॉक्टर उनकी मां की स्थिति देखने नहीं आया। परिवार का मानना है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण यह दुखद घटना घटी। चश्मदीदों के अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मां को साइलेंट अटैक आया था।

इस संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अरोड़ा नर्सिंग होम के मालिक, डॉ. डी.पी. सिंह अरोड़ा ने कहा कि ऑपरेशन सफल रहा था, लेकिन कई बार 50 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को अचानक साइलेंट अटैक आ जाता है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग करते हुए पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।

इस मामले की जांच के लिए थाना डिवीजन नंबर 3 के एसएचओ अमृतपाल शर्मा ने जानकारी दी कि एक चिकित्सकों के बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो मृतक महिला कीर्ति के शव का पोस्टमॉर्टम कराएगा। इसके बाद, डॉक्टरों द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस मामले में सही तथ्यों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके। यह घटना न केवल स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है।