MLA गोगी की नियति: उसी तारीख को अंत, जिस दिन की थी ‘आप’ ज्वाइन!

आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी का निधन 10 जनवरी की रात को हुआ। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गोगी अपनी पिस्टल को साफ कर रहे थे, तभी अचानक गोली चल गई, जो उनकी कनपटी को भेड़ती हुई निकल गई। इस गंभीर घटना से पूरे राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। 11 जनवरी को उनके अंतिम संस्कार के मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी उपस्थित हुए। गोगी का अंतिम संस्कार सिविल लाइन्स श्मशान घाट पर किया गया, जहां उनके परिवार के साथ विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा भी मौजूद थे। संधवा ने गोगी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वे हमेशा लुधियाना में मेरे स्वागत के लिए तैयार रहते थे।

गुरप्रीत बस्सी गोगी ने केवल तीन साल पहले आम आदमी पार्टी में शामिल होकर एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। वह पहले कांग्रेस के एक सक्रिय सदस्य थे और पिछले 23 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े रहे। 11 जनवरी 2022 को, उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल होने का फैसला किया। उनके इस कदम ने राजनीति में एक नया मोड़ डाल दिया, क्योंकि वे पंजाब के स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कार्पोरेशन के चेयरमैन थे। हालांकी गोगी ने हमेशा से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था।

गोगी का राजनीतिक जीवन कई विवादों और संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे थे, लेकिन बाद में कुछ मतभेदों और असहमति के चलते कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया। उनके बुड्डा दरिया की सफाई को लेकर जुनून ने उन्हें कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ खड़ा किया। गोगी ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए कई बार खुद कश्ती लेकर गंदे पानी में उतरने का साहस दिखाया। वह बुड्डा दरिया के हालात को लेकर अक्सर सरकार की नाकामी के खिलाफ मोर्चा खोलते थे।

गोगी का राजनीतिक दृष्टिकोण हमेशा जनता के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में उभरा। उनके पास कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां थीं, जिसमें 2019 में भारत भूषण आशू को चुनाव में हराना शामिल है। गोगी के इस चुनावी संघर्ष ने उन्हें अपने इलाके में एक लोकप्रिय नेता बना दिया था। उनकी स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाया। गोगी का सपना था कि बुड्डा दरिया स्वच्छ हो और वह इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहे। उनका अचानक निधन न केवल उनकी पार्टी बल्कि उनके प्रशंसकों और क्षेत्रवासियों के लिए भी एक भारी आघात है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और उनकी विरासत जीवित रहेगी।