‘विनोद भाई’ की कचौरी का जादू: नौकरी छोड़ बनाई खास मसाले वाली प्रसिद्ध कचौरी!

राजस्थान का खाद्य परिदृश्य कचौरी के स्वाद के बिना अधूरा है। जोधपुर की प्याज कचौरी, मावा कचौरी, कोटा की हींग कचौरी, अजमेर की कढ़ी कचौरी और नसीराबाद का कचौरा जैसे नाम इस बात के गवाह हैं। राजस्थान के हर शहर में स्ट्रीट फूड के शौकीनों के लिए कचौरी एक प्रिय डिश है। विशेष रूप से जयपुर में, “विनोद भाई” की कचौरी का एक अलग ही स्थान है। विनोद भाई का असली नाम विनोद जैन है, लेकिन लोग इन्हें प्यार से ‘विनोद भाई’ के नाम से जानते हैं। उनकी कचौरी की खासियत है इसमें भरा जाने वाला अद्भुत मसाला, जिसमें आलू, मटर और प्याज का अनोखा मिश्रण होता है।

विनोद भाई ने 1980 में जयपुर की एमआई रोड पर अपने कचौरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। शुरुआत में वे शहर के बड़े होटलों से कचौरी खरीदकर बेचते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उन्होंने महसूस किया कि उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प खुद कचौरी बनाना है। विनोद के पिता के ज्ञान और सलाह ने उनकी सोच को नया मोड़ दिया। उन्होंने अपने मसालों में प्रयोग कर एक नया स्वाद विकसित किया, जो दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुआ। तब से लेकर अब तक, यह कचौरी की दुकान जयपुर के लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध हो गई है।

विनोद जैन बताते हैं कि 2020 में उन्होंने एक नई कचौरी तैयार की, जिसमें आलू, मटर और प्याज का स्वादिष्ट भरावन था। इस कचौरी ने रेस्तरां में ग्राहकों को लुभाने का काम किया है। सुबह सात बजे से लेकर शाम पांच बजे तक हजारों लोग विनोद भाई की कचौरी का स्वाद चखने आते हैं। उनका भाई पंकज जैन भी इस व्यवसाय में उन्हें सहयोग करता है। दोनों मिलकर कचौरी बनाने की प्रक्रिया का ध्यान रखते हैं और प्रत्येक दिन ताजा मसाला तैयार करते हैं। एक बार मसाला खत्म हो जाने पर, वे कचौरी बनाना बंद कर देते हैं, जिससे ताजगी बनी रहती है।

विनोद का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। परिवार के अन्य सदस्य बैंकिंग क्षेत्र में काम करते थे, लेकिन विनोद ने अपने संघर्ष के दिनों में अपने पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाने की ठानी। एक समय ऐसा भी आ गया था जब उन्हें बैंक की नौकरी से अचानक निकाल दिया गया, जिससे उनका मनोबल टूट गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पिता के साथ मिलकर कचौरी की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से लोगों का प्यार पाया है, जो उनके लिए सबसे बड़ा मुनाफा साबित हुआ है।

विनोद भाई अपनी कचौरी में बदलाव भी करते रहते हैं। हर एकादशी पर वे काजू डालकर कचौरी बनाते हैं, और सर्दियों में अदरक का स्वाद मिलाते हैं। उनका विशेष कम्बिनेशन जिसमें आलू, मटर और प्याज का स्वादिष्ट मिश्रण होता है, लोगों को बेहद पसंद आता है। कचौरी पर अमचूर, धनिया, मिर्च और अदरक का मसाला डालकर इसे खास बनाते हैं। अजमेर की कढ़ी-कचौरी की मांग भी बढ़ने पर, उन्होंने इसे अपने मेनू में शामिल किया। इस प्रकार, उनकी कचौरी न केवल एक स्वादिष्ट भोजन है, बल्कि यह एक अनुभूति भी है, जो हर कौर के साथ जुड़ी हुई है।