कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लिए अपने प्रभारी बदलने का फैसला किया है। इस बदलाव के तहत बीके हरिप्रसाद को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है, जबकि रजनी पाटिल को हिमाचल तथा चंडीगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया है। वर्तमान प्रभारी दीपक बाबरिया को उनके स्वास्थ्य कारणों से हटाया गया है। विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी तबीयत खराब होने के चलते, उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पद से इस्तीफे का प्रस्ताव दिया, जिसे कांग्रेस के उच्च कमान ने स्वीकार नहीं किया। हाल ही में, निकाय चुनावों में उन्होंने कांग्रेस की चार संगठनात्मक सूचियों को जारी कर गुटबाजी को रोकने की कोशिश की थी।
हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी का इतिहास रेखांकित करते हुए, यह देखा गया है कि पिछले पांच वर्षों में तीन प्रभारी बदले जा चुके हैं। इस दौरान विवेक बंसल को 2020 में हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था, इसके बाद शक्ति सिंह गोहिल का कार्यकाल छह महीने चला, और फिर दीपक बाबरिया को 2023 में नियुक्त किया गया। पिछले सभी प्रभारी गुटबाजी को समाप्त करने में सफल नहीं हो सके, और अब बीके हरिप्रसाद की सबसे बड़ी चुनौती भी यही है। हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी ने उन्हें चुनावी हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया था।
दीपक बाबरिया के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस ने कई चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन किया है। उन्हें लगातार दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, जिसमें पहला उपचुनाव ऐलनाबाद और दूसरा आदमपुर उपचुनाव शामिल है। इन हारों ने उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। बाबरिया ने गुटबाजी को खत्म करने के लिए प्रयास किए, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 में से 5 सीटें गंवाईं, हालाँकि पिछली बार के मुकाबले उनका प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं आ सके।
चुनाव परिणामों के बाद दिल्ली में हुई एक वर्चुअल बैठक में, बाबरिया ने टिकट वितरण में हुई गलतियों को स्वीकार किया और कहा कि अगर उन्हें दोषी मान लिया जाता है तो वह अपनी जिम्मेदारी छोड़ने के लिए तैयार हैं। इस स्थिति में, क्षेत्रीय अध्यक्ष उदयभान ने बाबरिया के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें कोई ऐसा संदेश प्राप्त नहीं हुआ, जो कि बाबरिया ने आगे बढ़ाया था। यह स्थिति कांग्रेस पार्टी के अंदर की गुटबाजी और नेतृत्व के कमज़ोर होने को स्पष्ट करती है, जो आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस पार्टी हरियाणा और अन्य राज्यों में अपने प्रभारी बदलकर एक नई दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या बीके हरिप्रसाद इस गुटबाजी को खत्म करने और पार्टी को गति देने में सफल होंगे, या फिर कांग्रेस में अंतर्विरोधों का यह सिलसिला जारी रहेगा।