रायबरेली से कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि केस में सोमवार को सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत में गवाहों के बयान पर जिरह का दौर शुरू होगा। यह मामला तब सामने आया जब गृह मंत्री अमित शाह पर राहुल गांधी द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इस मामले में जनवरी 2023 में वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई कम से कम दो बार स्थगित हो चुकी है। इसके बाद, राहुल के वकील की तबीयत खराब होने के कारण भी जिरह नहीं हो सकी थी। अब, 11 फरवरी को परिवादी से जिरह पूरी हो चुकी है, और अब अगली सुनवाई में एक नए गवाह से जिरह कराई जाएगी।
इस मानहानि मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ MP-MLA कोर्ट में परिवाद दायर किया था। विजय मिश्रा का आरोप था कि कर्नाटक चुनाव के समय राहुल ने उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा हुई। मामला अदालत में लंबा चला, और जब राहुल गांधी पेश नहीं हुए, तो दिसंबर 2023 में अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया। इसके बाद, फरवरी 2024 में राहुल ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 के दो मुचलके पर जमानत दे दी।
26 जुलाई को राहुल गांधी ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगाये गए आरोप को राजनीतिक साजिश बताया। अदालत ने इसके बाद वादी को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 12 अगस्त को अदालत में सुनवाई में फिर से स्थगन हुआ, जब विशेष जज अवकाश पर चले गए। तथा कई बार सुनवाई टलने के कारण इस मामले की प्रगति धीमी रही। विशेषकर, वादी विजय मिश्रा की अस्वस्थता के कारण सुनवाई बार-बार स्थगित हो रही थी।
नवंबर और अक्टूबर में सुनवाई टलने का एक मुख्य कारण जज का अवकाश रहा, जिसके चलते अदालती कार्यवाही प्रभावित हुई। एक अक्टूबर और नौ अक्टूबर को भी सुनवाई में देरी हुई, इस बीच विज़य मिश्रा के अधिवक्ता द्वारा समय की मांग की गई। नवंबर की शुरुआत में दीपावली के कारण भी सुनवाई प्रभावित हुई और उसके बाद कुछ बार विधिक कार्यशालाओं के कारण सुनवाई स्थगित की गई। इस प्रकार, पिछले कुछ महीनों में मामले की सुनवाई में कई बार बाधाएं आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत में समय प्रबंधन और स्वास्थ्य समस्याएं दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
दूसरी ओर, हाल ही में प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के ड्राइवर ने आत्महत्या कर ली है, जिससे यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। आफाक अहमद ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दी, और परिवार का कहना है कि वे बेटे की मौत के बाद डिप्रेशन में थे। यह घटनाक्रम भी राजनीतिक और सामाजिक दृश्य पर सवाल उठाता है। इस प्रकार, राजनीति की दुनिया में मानहानि के मामलों से लेकर माफिया संपर्कों तक, कई मुद्दे सामने आ रहे हैं जिनका गहरा प्रभाव समाज पर पड़ रहा है।