लुधियाना में गैंगस्टर की संदिग्ध मौत: पुलिस कस्टडी पर परिवार का हंगामा!

पंजाब के गैंगस्टर सागर न्यूटन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके परिजनों ने बुधवार को आरती चौक पर धरना दिया। गैंगस्टर का निधन पीजीआई में पुलिस हिरासत के दौरान हुआ था, जिसके बाद परिवार वालों ने सड़कों को जाम कर सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की मौत अस्पताल में चिकित्सकों और पुलिस की मिलीभगत से जहर देकर की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस सागर को पहले से ही प्रताड़ित कर रही थी, जिससे वह बहुत परेशान था।

सागर न्यूटन के वकील साहिल शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी मौत अत्यंत संदिग्ध है। पिछले एक सप्ताह से पुलिस ने सागर को इलाज के बहाने विभिन्न अस्पतालों में भटकाया, जबकि पुलिस अब उसके किडनी फेल होने और शुगर लेवल कम होने जैसे बेतुके बहाने बना रही है। वकील ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय में लेकर जाएंगे, क्योंकि पुलिस कस्टडी में हुई मौत के लिए जिम्मेदारी पुलिस की बनती है। परिजनों ने न्यायिक जांच की मांग की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात की।

गौरतलब है कि लुधियाना पुलिस को काफी समय से सागर न्यूटन की तलाश थी। 20 अगस्त 2024 को उसे उत्तर प्रदेश के बिजनौर से गिरफ्तार किया गया था। ज्ञात हो कि सागर, पुलिस द्वारा चेतावनी मिलने के बाद अपने किसी रिश्तेदार के घर से भागकर गन्ने के खेत में छिप गया था। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं, और उसने सभी मामलों की जिम्मेदारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ली थी। इससे Punjab सरकार और पुलिस ने सागर के दस से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिए थे।

सागर की पत्नी, वंशिका, भी वर्तमान में जेल में बंद है। बताया जाता है कि सागर ने पुलिस को धमकी दी थी कि यदि उनकी पत्नी को रिहा नहीं किया गया तो वह अपने गैंगस्टर के काम को जारी रखेगा, लेकिन अगर उसकी पत्नी रिहा हो गई तो वह खुद आत्मसमर्पण कर देगा। बता दें कि लुधियाना पुलिस ने सागर न्यूटन को दुगरी क्षेत्र में एक मकान में छिपने के दौरान पकड़ा था, जहां एक परिवार पर कातिलाना हमले का आरोप लगाया गया था। इस हमले में एक महिला की भी मौत हो गई थी।

इस घटना ने न केवल स्थानीय निवासियों में भय उत्पन्न किया है, बल्कि न्याय के प्रति भी सबसे बड़ी चिंता को जन्म दिया है। परिजन और समर्थक न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, और इस मामले में सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस मामले की पूरी पारदर्शिता से जांच कर पाएगी और परिवार को न्याय दिलाने में सक्षम होगी?