महाकुंभ का वर्तमान समय 37वां दिन है, जिसमें 13 जनवरी से लेकर अब तक 54 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया है। इस भारी भीड़ के चलते अनेक लोग अपने परिवार के साथ कारों में बाहर से आ रहे हैं, जिसके कारण हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई है। खासकर नैनी के नए ब्रिज और फाफामऊ जैसे क्षेत्रों में देर रात तक कारों की 10-12 किमी लंबी कतारें दिखीं। संगम की ओर जाने वाली सड़कों पर स्थिति इतनी गंभीर है कि लगभग 12 से 15 किमी तक रास्ता जाम है। इस भीड़-भाड़ के चलते पैदल चलना भी कठिन हो रहा है।
महाकुंभ में अब तक साढ़े 7 लाख श्रद्धालुओं का इलाज किया गया है। अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया और इजराइल के चिकित्सा विशेषज्ञों ने महाकुंभ के अस्थायी अस्पताल की सुविधाओं का अवलोकन किया और इसे सराहा। उनका कहना था कि योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रयागराज में जो मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, वैसी दुनिया के किसी कोने में नहीं देखी गई। महाकुंभ में 4000 से अधिक छोटे और 12 बड़े ऑपरेशनों के साथ-साथ 23 एलोपैथिक अस्पतालों ने साढ़े पांच लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज किया है। अतिरिक्त रूप से, आयुष चिकित्सा के तहत भी 2.25 लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया गया है।
भीड़ की अधिकता के कारण दारागंज स्थित संगम स्टेशन को 26 फरवरी तक बंद करने का निर्णय लिया गया है, और महाकुंभ में तैनात अधिकारियों की ड्यूटी अब 27 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। वहीं, इंटरमीडिएट स्तर तक के स्कूलों को 20 फरवरी तक बंद किया गया है। इसके अतिरिक्त, 16 फरवरी से शुरू हुआ इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल आज अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, जिसमें लगभग 200 प्रजातियों के पक्षियों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इस मेले में लुप्तप्राय पक्षियों जैसे इंडियन स्कीमर, फ्लेमिंगो और साइबेरियन क्रेन का दीदार करने का भी अवसर है।
महाकुंभ के दौरान एक दिन पूर्व यानी सोमवार रात को भीषण जाम की स्थिति देखी गई थी। संगम से लेकर फाफामऊ तक 12 किमी का जाम लगा रहा, जिससे श्रद्धालुओ की यात्रा प्रभावित हुई। वहीं, सेक्टर-8 में आग लगने की घटना भी हुई, जिसमें कई पंडाल जल कर राख हो गए। महाकुंभ में पहली बार नगर निगम सदन की बैठक भी आयोजित की गई, और गंगा पंडाल में करीब 10 हजार लोगों ने हाथ की प्रिंटिंग बनाकर एक नया इतिहास रचा।
अंत में, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन संगम से 10-12 किमी पहले ही रोक दिए गए हैं, जहां से उनके लिए शटल बसों की व्यवस्था की गई है। भारी जाम के कारण शटल बसों का आवागमन भी कठिन हो गया है, और आगंतुकों को पार्किंग और स्टेशन से लगभग 10 से 15 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। इसके साथ ही, वीवीआईपी पास भी निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे कि स्थिति को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके।