महाकुंभ के 45 दिनों में 65 करोड़ लोगों की डुबकी, ममता कुलकर्णी का प्रभावशील प्रकट!

महाकुंभ, जो संसार का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, 45 दिनों तक चला और इस दौरान 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। इस मेले की शुरुआत 13 जनवरी को शाही स्नान के साथ हुई और इसका समापन महाशिवरात्रि के अवसर पर 26 फरवरी को हुआ। इस दौरान संगम नगरी प्रयागराज में न केवल आस्था का उमंग देखने को मिला, बल्कि कई घटनाएं भी घटीं जो इसे खास बनाती हैं।

10 जनवरी से अखाड़ों की भव्य पेशवाई प्रारंभ हुई, इस दौरान नागा संन्यासी करतब करते हुए और मस्ती में झूमते हुए संगम की ओर बढ़ते रहे। इस महाकुंभ में किन्नर अखाड़ा विशेष रूप से चर्चा का विषय बना। बॉलीवुड की एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने पर विवाद उभरा, जिसके चलते उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, कुछ समय बाद वे फिर से अखाड़े में शामिल हो गईं, जिससे उनकी चर्चा और बढ़ गई।

महाकुंभ के दौरान 28-29 जनवरी की रात मौनी अमावस्या पर भयानक भगदड़ मची। इस घटना में कई श्रद्धालु गिरकर बुरी तरह कुचले गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई, जिससे वहां उपस्थित श्रद्धालुओं में हाहाकार मच गया। परिवारों के सदस्य अपने प्रियजनों को खोने के दुख में बिलखते नजर आए, जिससे पूरे माहौल में मातम छा गया।

प्रयागराज में प्रतिदिन करोड़ों श्रद्धालुओं की आमद से शहर की सड़कें विशाल जनसैलाब में तब्दील हो गईं, जिससे जाम की स्थिति बन गई। हर एंट्री प्वाइंट पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे स्थानीय निवासियों को घरों में कैद रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस स्थिति ने शहर के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी, जबकि श्रद्धालुओं की आस्था और अनुराग में कोई कमी नहीं आई।

इस महाकुंभ के 45 दिनों के अनुभवों और घटनाओं की एक झलक पाने के लिए आपको वीडियो पर क्लिक करना चाहिए। यह आयोजन न केवल भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि एकता, श्रद्धा और विश्वास का महोत्सव भी है। महाकुंभ सभी धर्मों और समुदायों को एक साथ आने और अपनी आस्था का प्रदर्शन करने का एक अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार, यह न केवल धार्मिक अनुष्ठान का एक अहम् हिस्सा है, बल्कि यह हमारी सामाजिक एकता को भी मजबूत बनाता है।