कर्मो ड्योढ़ी में बावा लाल दयाल जी जन्मोत्सव पर भक्तों का तांता, हजारों ने टेका माथा!

**अमृतसर में बावा लाल दयाल जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया**

अमृतसर में बावा लाल दयाल जी के जन्मोत्सव पर कर्मो ड्योढ़ी के गद्दी बावा लाल दयाल में भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर, गद्दी के प्रमुख श्रीश्री 108 महंत अनंतदास महाराज की अध्यक्षता में बावा जी को पंचामृत स्नान करवाया गया। पवित्र स्नान के लिए दूध, दही, शक्कर, देसी घी और गंगाजल का उपयोग किया गया। इस संतोषजनक आयोजन के पश्चात, बावा जी का सुशोभित वस्त्र पहनाया गया, जिससे उनकी महानता को और बढ़ाया गया।

समारोह की भव्यता को बढ़ाने के लिए सुबह से ही सत्संग और हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। इस दौरान, मंदिर परिसर को सुगंधित फूलों, जैसे गेंदा, गुलाब और चमेली से सजाया गया। सेवादारों की टीम ने बावा जी को फूलों से भव्य बंगला तैयार किया। भक्तों की एक लंबी कतार नजर आई, जो बावा जी के चरणों में माथा टेकने के लिए अपना इंतजार कर रही थी। इसके साथ ही, शहर के नए मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया ने भी मंदिर में आकर बावा जी को प्रणाम किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

भजन मंडलियों ने बावा जी का गुणगान करते हुए भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। गणेश वंदना के साथ शुरू हुए संकीर्तन में कई भजन गायकों ने अपने स्वर में बावा जी की महिमा का गान किया। राजीव वैष्णव, अजय कुमार, दिनेश शर्मा, रेनू गुप्ता, गोल्डी, प्रिया दत्त, कुमार मुकेश, संदीप, मीत सिस्टर, पवन और बंटी दीवाना जैसे कलाकारों ने ‘बावा लाल प्यार दा सहारा चाहिदा, भूखी भूखी जिंदगी च सहारा चाहिए दा’ जैसे भजनों को गाकर भक्त जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संपूर्ण दिन चले इस भक्ति समारोह के दौरान भक्तों ने बावा जी को विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाए, जिन्हें संगत में भेंट किया गया। इस धार्मिक आयोजन में शहर के कई नेता भी शामिल हुए, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। रात में संकीर्तन के दौरान भक्तों की संख्या और भी बढ़ गई, और सभी ने मिलकर बावा जी के प्रति अपने आभार और सम्मान को प्रकट किया। यह जन्मोत्सव न केवल आस्था का प्रतीक था, बल्कि एकता और भक्ति का भी अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

इस प्रकार, अमृतसर में बावा लाल दयाल जी के जन्मोत्सव ने सामाजिक और धार्मिक एकता को बढ़ावा देते हुए भक्तों के दिलों में अपने स्थान को और मजबूत किया है। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को जागृत किया बल्कि भक्तों को एक साथ लाने का काम भी किया। बावा जी की महिमा का गान करते हुए, सभी ने मिलकर इस अद्भुत अवसर का आनंद लिया।