लुधियाना में किसानों पर पुलिस का कहर: हिरासत में कई, रिलायंस गैस प्लांट के खिलाफ हंगामा!

**लुधियाना का बग्गा कलां: प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई से किसान नाराज**

लुधियाना के बग्गा कलां क्षेत्र में आज सुबह पुलिस द्वारा किसानों के प्रदर्शन पर कार्रवाई की गई, जिसके चलते इलाके में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय किसानों ने रिलायंस गैस प्लांट के समीप प्रदर्शन करते हुए वहां ताला लगा रखा था। पुलिस ने सुबह करीब 5 बजे इस प्रदर्शन को खत्म करने के लिए दबिश दी और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, इन किसानों को कहां ले जाया गया है, इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

किसानों का यह प्रदर्शन एक निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट के खिलाफ चल रहा है। ग्रामीण लंबे समय से इस प्लांट के संचालन पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं और मानते हैं कि इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय निवासी सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष दिलबाग सिंह गिल ने कहा कि इस प्रदर्शन में शामिल कई किसान पिछले कुछ हफ्तों से इस मुद्दे को लेकर जागरूकता फैला रहे थे।

इस बीच, जब पुलिस कार्रवाई कर रही थी, दिलबाग और किसान नेता हरनेक सिंह लाडिया को भागने में सफलता मिली। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय किसान यूनियन दोआबा के प्रधान इंद्रबीर सिंह कादियान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें निवास स्थान पर नजरबंद कर दिया गया है। इस कार्रवाई का आदेश किसने दिया है, यह जानने की प्रयास में सभी नागरिक पुलिस अधिकारियों की ओर से मौन साधे हुए हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।

किसान इस पुलिस कार्रवाई को कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। वे आज एकत्रित होने की योजना बना रहे हैं ताकि आने वाले संघर्ष की रणनीति तैयार कर सकें। कुछ किसान नेताओं के घरों के बाहर भी पुलिस की तैनाती देखी जा रही है, जो यह दर्शाता है कि सरकार किसानों के इस आक्रोश को दबाने की पूरी कोशिश कर रही है।

किसानों की मांगें सुनने के लिए अब उनकी एकजुटता महत्वपूर्ण हो गई है। वे यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि उनके मुद्दों को उठाया जाए और उनकी आवाज को अनसुना न किया जाए। लुधियाना में किसानों का यह आंदोलन एक बार फिर से उन समस्याओं को उजागर कर रहा है, जिन्हें कई बार नजरअंदाज किया गया है। यह मामला केवल बायोगैस प्लांट का नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों और उनकी आवाज की रक्षा का भी है।