उत्तर प्रदेश की राजधानी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों से बहने वाली गोमती, यमुना, घाघरा (सरयू), बेतवा और चंबल जैसी नदियों के जलमार्गों में क्रूज और मालवाहक जहाजों के संचालन की योजना को अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। गंगा के जलमार्ग विकास के बाद अब राज्य सरकार ने 10 अन्य नदियों को भी जल परिवहन के लिए विकसित करने का निर्णय लिया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन को स्वीकृति मिली है। इस दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि विश्व बैंक सहित केंद्र सरकार भी जलमार्ग विकास में सहायता प्रदान करेगी। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि यह माल ढुलाई की लागत को सड़कों और रेल की तुलना में भी कम करेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि जलमार्गों के माध्यम से परिवहन को औसतन 1.20 रुपए प्रति टन, प्रति किलोमीटर की दर से सस्ती ढुलाई के विकल्प उपलब्ध कराया जा सकेगा। जैसे ही अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन होगा, यह नदियों के विकास से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मामलों का ध्यान रखेगा। इसमें प्रमुख सदस्य भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी होंगे। प्राधिकरण का गठन नदियों के माध्यम से मालौंपराण को सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
राज्य सरकार ने जनहित में नदियों के जलमार्गों के विकास का निर्णय लिया है। नदियों में जल परिवहन न केवल व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी करेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों और पर्यटकों के लिए नए अवसर भी लाएगा। उधर, उत्तर प्रदेश की नदियों में क्रूज पर्यटन का भी विकास होने जा रहा है, जिससे युजर्स को रोजगार के नए साधन उपलब्ध होंगे। इस संबंध में योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट की बैठक में जलमार्ग प्राधिकरण के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया।
जलमार्गों के विकास की प्रक्रिया में नदियों की गहराई, जलस्तर और चौड़ाई जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। हाल में, गंगा जलमार्ग के सफल संचालन के अनुभव को आधार मानते हुए प्रदेश की नदियों का गहराई मूल्यांकन किया जाएगा। जैसे कि बेतवा, चंबल और गोमती की गहराई दो मीटर से अधिक है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि यहां भारी माल ढोने के लिए जहाज़ आसानी से चल सकें। अंतर्देशीय जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई के लिए अधिकतर नदियों में हालात अनुकूल पाए जा रहे हैं।
जलमार्ग विकास को लेकर केंद्र सरकार द्वारा भी 35 प्रतिशत सब्सिडी देने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में जलमार्गों के विकास के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण की जरूरत है। वाराणसी से हल्दिया के बीच जलमार्ग पर अब तक कई सफलताएं देखने को मिली हैं। जलमार्ग के जरिए माल перевозाने में भारी वृद्धि हुई है और यह तरीका तेजी से सस्ता और सामर्थ्य पूर्ण साबित हो रहा है। इस प्रकार, प्रदेश की जलमार्ग विकास योजना न केवल आर्थिक विकास का साधन बनेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प उपलब्ध कराएगी।
अंत में, सरकार की यह नई पहल न केवल उत्तर प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जलमार्ग का विकास स्थानीय व्यवसायों तथा पर्यटन उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ सभी संबंधित समुदायों के लिए लाभदायक साबित होगा। इस दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से राज्य की आर्थित सुरक्षा और विकास को सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।