एसआई भर्ती विवाद को लेकर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई फिर से अधूरी रह गई। सुनवाई के दौरान सरकार के लगातार यह कहने पर कि वह अभी निर्णय प्रक्रिया में है, न्यायालय ने नाराजगी जताई। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने चुटकी लेते हुए पूछा कि सरकार भर्ती के मामले में अंतिम निर्णय क्यों नहीं ले पा रही है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को अब केवल एक महीने नहीं, बल्कि दो महीने का समय दिया जाता है। इस दौरान सरकार को भर्ती को लेकर ठोस निर्णय लेते हुए अदालत को सूचित करना होगा। हालांकि, सरकार की ओर से इस विषय पर किसी भी प्रकार का जवाब नहीं आया। अब मंगलवार को सरकार एक बार फिर उच्च न्यायालय में अपनी बात रखेगी।
सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने सुनवाई में हिस्सा लेते हुए कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि भर्ती को रद्द किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार जो भी निर्णय करेगी, वह कानूनी रूप से सही होना चाहिए। इस पर जस्टिस समीर जैन ने निर्देश दिया कि सरकार को तय समय के भीतर अपने फैसले की घोषणा करनी चाहिए। अदालत ने इस पूरे मामले में यह जानने की कोशिश की कि आखिरकार सरकार की जांच और महाधिवक्ता की राय एक तरफ है, जबकि कोर्ट में दूसरी दिशा की बात हो रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर कोई बैठक होती है, तो उसके मिनट्स क्यों नहीं रिकॉर्ड किए जाते?
जुड़े पूर्वी मामलों में, कोर्ट ने सरकार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार हमसे कुछ छुपा रही है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि कोर्ट के स्टे आदेश के बावजूद सरकार ने ट्रेनी एसआई को फील्ड ट्रेनिंग पर भेज दिया है। अगर सरकार की तरफ से जांच सही दिशा में नहीं चल रही है, तो अदालत ने सुझाव दिया कि इस मामले को सीबीआई को सौंपने का विचार किया जाना चाहिए। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह एसआई भर्ती में एसओजी पर दबाव बना रही है।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान एएजी विज्ञान शाह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने गलत तथ्यों के आधार पर कोर्ट में याचिका लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार से बाधा पैदा करने का कोई इरादा नहीं रखा है। भर्ती मामले में यह सुनवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाएगी। अब पूरे मामले पर अदालत का अगला निर्णय क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।
अंततः, कोर्ट ने सरकार को समय दिया है और यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की सूचनाएं छुपाई नहीं जानी चाहिए। इस पूरे मामले में अधिकतम पारदर्शिता और सही निर्णय की आवश्यकता है, ताकि भरोसा बना रहे और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। आगामी सुनवाई में यह देखना होगा कि सरकार अपने स्थायी निर्णय के लिए क्या कदम उठाएगी।