**बहराइच हिंसा के बाद रामगोपाल मिश्रा की पत्नी की व्यथा: नौकरी के लिए तरसती रौली**
बहराइच हिंसा में मारे गए रामगोपाल मिश्रा की पत्नी रौली मिश्रा ने कहा है कि यूपी सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया, लेकिन आज तक उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई है। रौली, जो शादी के तीन महीने बाद ही विधवा हो गई थीं, अब अपने ससुराल में अपने पति के बुजुर्ग माता-पिता के साथ रह रही हैं। बेरोजगारी का सामना कर रहीं रौली कहती हैं, “हमें बस नौकरी की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक सुरेश्वर सिंह और जिलाधिकारी मोनिका रानी ने उन्हें बार-बार 15 दिन, एक महीने, फिर दो महीने की बात कहकर टाल दिया है।
छह महीने पहले हुई इस घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम बहराइच पहुंची और रौली तथा उनके परिवार का हाल जानने का प्रयास किया। गांव में पहुंचने पर एक अजीब सी खामोशी देखने को मिली। रौली का घर देख कर पता चला कि उनके पति की असमय मौत के बाद घर का माहौल कितना बदल गया है। रौली ने अपने पति की यादों को संजोकर रखा है और चाहती हैं कि आने वाले समय में उनके साथ न्याय हो।
रौली ने बताया कि चार महीने पहले उनके सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे, लेकिन आज तक नौकरी नहीं मिली। उन्होंने कहा, “डीएम कहती हैं कि परेशान मत हो। जल्दी ही नौकरी मिल जाएगी।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सीएम से मिलने का प्रयास किया है, तो उन्होंने कहा, “हम लखनऊ जाना चाहते थे, लेकिन मिल नहीं पाए। हमारे पास अब पैसे की कमी है और कोई सहारा नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें घर बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए मिले हैं। हालांकि, घर का निर्माण बेहद धीमी गति से हो रहा है। “हमने करीब 5 लाख रुपये में से 4.5 लाख रुपये खर्च कर दिए,” वह कहती हैं। रौली ने बताया कि उन्होंने अपने पति की याद में उनके नाम से कुछ करना चाहा, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। उनके मन में अब भी गहरी पीड़ा है, जिसे वे शब्दों में नहीं कह सकतीं।
इस सब के बीच, जब हमारी टीम ने स्थानीय विधायक सुरेश्वर सिंह से रौली की नौकरी के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि रौली कस्तूरबा गांधी स्कूल में काम कर रही हैं। लेकिन रौली ने इस दावे को गलत ठहराया। विधायक की बातें और रौली की हकीकत का यह विरोधाभास उम्मीदें और वास्तविकता के बीच की खाई को दर्शाता है। बहराइच में हुई हिंसा और उसके बाद के घटनाक्रम से प्रभावित परिवार की परेशानियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें न्याय और सहायता मिल सके।
**खुद का ऑपरेशन करने वाले युवक की कहानी**
मथुरा में एक 32 वर्षीय युवक ने खुद का ऑपरेशन करने की नाटकीय घटना सुर्खियों में है। दर्द से परेशान युवक ने यूट्यूब देखकर ऑपरेशन करने की विधि सीखी और फिर खुद ही अपने पेट को चीर डाला। यह घटना न केवल उसकी हिम्मत को दर्शाती है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों पर भी प्रकाश डालती है। इस युवक की कहानी यह दर्शाती है कि किस प्रकार लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति इतना हताश हो जाते हैं कि वे खुद को यह जोखिम उठाने के लिए मजबूर करते हैं।
इस घटना ने हमें इस बात की याद दिलाई है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कितनी आवश्यकता है, ताकि किसी को इस प्रकार के कदम उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े।