मरीजों की खरीद-फरोख्त: भास्कर के खुलासे पर 4 हॉस्पिटल्स के लाइसेंस रद्द, गोरखपुर में बड़ा एक्शन!

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों का सौदा और कमीशनखोरी का खुलासा दैनिक भास्कर ने किया है, जो न केवल चौंकाने वाला बल्कि गंभीर है। इस रिपोर्ट का शीर्षक था ‘डॉक्टर बोले- मरीज दीजिए, लाखों कमाएंगे; भास्कर के स्टिंग में हॉस्पिटल एक्सपोज’। इस स्टिंग ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, यूपी सरकार ने गोरखपुर के चार अस्पतालों का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, चार अन्य अस्पतालों को नोटिस भी जारी किया गया है और उनसे एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है। गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आशुतोष दुबे के अनुसार, जिन अस्पतालों के लोग मरीजों के व्यापार में संलिप्त पाए गए हैं, उनके लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है, जबकि स्थायी निलंबन के लिए नोटिस जारी किया गया है।

गोरखपुर के जिन अस्पतालों का लाइसेंस रद्द किया गया है, उनमें हेरिटेज हॉस्पिटल, न्यू शिवाय मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गोरक्ष हॉस्पिटल और न्यू जीवन हॉस्पिटल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मेकवेल हॉस्पिटल, श्रीवेदना मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, डिसेंट हॉस्पिटल और शाही ग्लोबल हॉस्पिटल को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। दैनिक भास्कर की जांच में सामने आया है कि यूपी के अस्पतालों में मरीजों का सौदा किया जा रहा है, जहां एजेंट सामान्य मरीजों के लिए 40% कमीशन और गंभीर मरीजों के लिए 30 हजार रुपये तक का दर तय करते हैं।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने के लिए भी कमीशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया जाता है। अस्पताल संचालकों ने अंडरकवर रिपोर्टरों के सामने दवा, जांच और बिस्तर की कीमतें भी तय की हुई बताई हैं। इसमें बड़े और छोटे प्राइवेट तथा सरकारी अस्पताल शामिल हैं। दैनिक भास्कर ने इस जांच के लिए बिहार के बगहा से लेकर गोरखपुर के बीच 30 दिनों तक गहन सर्वेक्षण किया। इस दौरान 10 प्राइवेट अस्पताल संचालक, बिहार सरकार का एक स्वास्थ्यकर्मी, एक आशा कार्यकर्ता और कई अन्य स्टाफ हमारे कैमरे में डील करते हुए कैद हुए।

यूपी के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मुद्दे पर कहा कि बिहार में ऐसी व्यवस्थाएं बननी चाहिए जिससे कि इस तरह की हरकतें रोकी जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिन डॉक्टरों और अस्पतालों ने इस तरह की बेईमानी की है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार, पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। यह गंभीर मामला सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव और भी व्यापक हो सकते हैं, जिससे प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

इस खुलासे ने समस्त स्वास्थ्य प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और यह आवश्यक हो गया है कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।