बहराइच के गांवों में कुत्तों का आतंक: लोग डरे, बच्चों ने स्कूल छोड़ा!

**बहराइच में आदमखोर कुत्तों का आतंक: लोग सुरक्षित रहने के लिए लाठी-डंडा लेकर निकलने को मजबूर**

बहराइच ज़िले के चार गांवों में हाल ही में आदमखोर कुत्तों के हमलों की खबर से स्थानीय लोग दहशत में हैं। गांव के लोगों को सावधान करते हुए जिला प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से अनाउंसमेंट किया है कि कुत्ते झुंड में हमला कर रहे हैं, इसलिए लोग घर से निकलते समय लाठी-डंडा लेकर चलें। मटेरा कला, बक्शीपुरा, रखौना, और खैरीघाट के रहवासी इस खौफनाक स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं।

पिछले कुछ दिनों में, इन गांवों में कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 10 दिनों के भीतर कुत्तों ने 15 से अधिक लोगों को घायल कर दिया है, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं। गांव के मटेरा कला में एक 9 वर्षीय बच्ची, पिंकी, पर कुत्तों ने हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। यह घटना स्थानीय समुदाय के लिए एक काला धब्बा बन गई है और लोगों के बीच दहशत का माहौल उत्पन्न कर दिया है।

गांवों में शांति और सुरक्षा की स्थिति हर पल चिंता का विषय बनी हुई है। थोकड़े हुए कुत्तों ने कई बार बच्चों पर घातक हमले किए हैं। एक अन्य घटना में 4 वर्षीय बच्ची आरती पर कुत्तों ने हमला किया, लेकिन समय पर ग्रामीणों ने उसे बचा लिया। चिंता का विषय यह है कि लोग अब अपने बच्चों को घर से बाहर खेलने नहीं भेज रहे हैं और रात में पहरा देने को मजबूर हो गए हैं।

प्रशासन ने कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया है, लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिली है। हालांकि, कुछ कुत्तों को पकड़ा गया है, जिनका बंध्याकरण किया जाएगा। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग के अनुसार, कुत्तों का यह आक्रामक व्यवहार जंगल के करीब रहने के कारण बढ़ गया है। पहले इस क्षेत्र में भेड़ियों का आतंक था, जो अब कुत्तों की आक्रामकता में बदल गया है।

बहराइच में स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। स्थानीय निवासी और प्रशासन दोनों ही इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि पुलिस और स्थानीय अधिकारियों को इस दिशा में अधिक सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है। जब तक कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक ग्रामीणों को इस खतरे से निपटने के लिए अपने बचाव के उपाय करने होंगे।

कुल मिलाकर, बहराइच के ये गांव न केवल कुत्तों के हमलों बल्कि तेंदुओं और भेड़ियों के आतंक से भी जूझते रहे हैं। इससे साफ है कि यहां के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, ताकि वो अपने रोजमर्रा के जीवन को बिना भय के जी सकें।