डॉ अभय को मिला आईसीएसएसआर की रिसर्च परियोजना
रांची, 7 मार्च (हि.स.)।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, भूगोल विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ अभय कृष्ण सिंह को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), नई दिल्ली से ‘नील-हरित अवसरचना (ब्लून ग्रीन इंफ्रास्ट्रसक्चलर) के नुकसान और इसके जलवायुवीय जलचक्रीय गतिकी (हाइड्रोक्लावइमेटिक डाइनेमिक्सो) और आजीविका पर प्रभाव विषय पर 30 लाख रुपये की मेजर रिसर्च परियोजाना स्वीकृत हुई है।
यह विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार है कि किसी शोधकर्ता को आईसीएसएसआर से मेजर रिसर्च परियोजना प्राप्त हुई है, जिससे यह संपूर्ण विश्वविद्यालय समुदाय के लिए गर्व की बात है।
यह परियोजना रांची और उसके शहरी क्षेत्र में 1974 से 2024 के बीच नील-हरित अवसंरचना (बीजीआई) में आए परिवर्तनों का भू-स्थानिक तकनीकों (जीओसपैटिअल टेक्निक्सू) और रिमोट सेंसिंग की सहायता से विश्लेषण करेगी।
डॉ अभय कृष्ण सिंह प्रतिबद्ध शोधकर्ता और भू-स्थानिक तकनीकों के विशेषज्ञ हैं। वे विश्वविद्यालय के रिमोट सेसिंग और जीआईएस विभाग के प्रमुख भी हैं।
उन्होंने दो पुस्तकें लिखी हैं और उनके 30 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ सिंह हाइड्रोक्लाइमेटिक (जलवायुचीय-जलचक्रीय) समस्याओं के समाधान के लिए ‘स्पंज सिटी अवधारणा के प्रबल समर्थक हैं। उनकी यह परियोजना रांची में स्पंज सिटी मॉडल की व्यवहार्यता, संभाव्यता और व्यावहारिकता का मूल्यांकन करेगी, जिससे जल संरक्षण, जलभराव की रोकथाम और जलवायु संतुलन की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।
यह परियोजना अगले दो वर्षों तक चलेगी और इसके निष्कर्ष शहरी नियोजन तथा जलवायु प्रबंधन की प्रभावी नीतियों तैयार करने में सहायक होंगे। डॉ सिंह की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार एवं शोध जगत में हर्ष और गर्व का वातावरण है। यह शोध न केवल रांची शहर की पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान देगा, बल्कि भारत के अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल तैयार करेगा।
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