हरियाणा पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने शानदार कार्य करते हुए 17 साल से लापता एक युवक को उसके माता-पिता से मिलवाया है। यह युवक, जिसका नाम आरिफ खान है, 2008 में दिल्ली के कापसहेड़ा क्षेत्र से तब लापता हुआ था जब वह महज 6 साल का था। आरिफ उस दिन घर से टॉफी लेने निकला था, लेकिन वापस नहीं लौट पाया। उसके परिवार ने कापसहेड़ा थाने में उसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरिफ की खोज शुरू की और उसे अंततः उसके परिवार से मिलाने में सफल रही।
आरिफ लापता होने के बाद से कई साल तक गुरुग्राम जिले में बाल संरक्षण संस्था, बालग्राम राई में रह रहा था। वहां रहते हुए उसने आईटीआई की पढ़ाई पूरी की और वर्तमान में वह बीए के अंतिम वर्ष का छात्र है। हालांकि, आरिफ को अपने परिवार के बारे में कोई जानकारी या याद नहीं थी। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की पुलिस टीम ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर उसके परिवार का पता लगाने की कोशिश की और अंततः दिल्ली के संगम विहार में आरिफ के परिवार का पता लगाया।
आरिफ के माता-पिता का नाम एहसान और उसकी माता है। 24 मार्च 2025 को जब आरिफ को अपने माता-पिता से मिलवाया गया तब यह एक भावुक क्षण था। उसके माता-पिता ने हरियाणा पुलिस का आभार व्यक्त किया और उनकी संवेदनशीलता की सराहना की। इस अवसर पर हरियाणा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ममता सिंह ने सभी परिजनों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चों के आधार कार्ड की पहचान अवश्य बनवाएं और समय-समय पर उन्हें अपडेट कराते रहें, ताकि भविष्य में इसी तरह के मामलों में बच्चों की पहचान में आसानी हो।
आरिफ की पहचान के लिए उसकी मां ने उसके माथे पर मौजूद चोट के निशान का उल्लेख किया, जो कि आरिफ की पहचान को सही साबित करने में सहायक था। इससे यह साबित हुआ कि पुलिस टीम ने सही व्यक्ति से संपर्क किया है। इस कहानी का अंत एक दुखद घटना से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह एक सुखद मिलन के रूप में समाप्त हुआ है जो सभी के लिए आशा का प्रतीक है।
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम को उनके कार्य के लिए बधाई दी। उन्होंने टीम को सुझाव दिया कि ऐसे ही संवेदनशीलता के साथ अपने कार्य को जारी रखें, ताकि भविष्य में और भी लापता व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाया जा सके। यह घटना न केवल पुलिस कार्य के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि यह समाज में मानव तस्करी और लापता व्यक्तियों की समस्याओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।