गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई क्षेत्रों में होली के पहले ही लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। एक दर्जन से अधिक शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जो कि सामान्य से 8.8 डिग्री अधिक है। पिछले दो दिनों में गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के 17 शहरों में अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है। यह केवल तीन वर्षों में दूसरा अवसर है, जब मार्च के पहले पखवाड़े में लू का अनुभव किया जा रहा है। पिछले साल भी यही स्थिति थी जब 11 से 19 मार्च तक लू का प्रभाव गुजरात में महसूस हुआ था, जबकि तब होली 8 मार्च को थी।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष होली के दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत में हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी तट के कोंकण इलाके में गुरुवार से तापमान में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन लू का दौर जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 13 और 14 मार्च को भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की गई है। ओडिशा में 13 से 16 मार्च, झारखंड में 14 से 16 मार्च और पश्चिम बंगाल में 18 मार्च को भी लू का प्रकोप बढ़ने की आशंका बताई जा रही है।
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां भी मार्च के अगले सप्ताह में लू चलने की संभावना है। प्रदेश के ग्वालियर में तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक है। मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडेय के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं जिससे लोगों को गर्मी का अधिक अनुभव हो रहा है। इस दौरान भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग में भी तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक रहा है।
गुजारी स्थितियों से साफ है कि इन दिनों प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तापमान काफी बढ़ गया है। भोपाल में 38 डिग्री, धार में 39.1 डिग्री, नर्मदापुरम में 39.0 डिग्री और रतलाम में 38.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। इसके अलावा, खुजुराहो और कन्नौद में भी गर्मी का स्तर सामान्य तापमान से अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में लू के प्रकोप में और वृद्धि हो सकती है, जिसके कारण लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है और उन्हें बाहर निकलते समय ऊपर से खुद को सुरक्षित रखने के उपाय करने चाहिए।
इस प्रकार, मार्च के पहले पखवाड़े में लू से यह स्थिति इस बात का संकेत है कि गर्मी का मौसम जल्दी शुरू हो रहा है, जो कि आगे चलकर और भी गंभीर हो सकता है। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इसे गंभीरता से लें और आवश्यक सावधानियां बरतें।