IIT कानपुर महाकुंभ की चूक का खुलासा करेगी, 9 विभागीय एक्सपर्ट्स भेजेंगे रिपोर्ट!

प्रयागराज के महाकुंभ के सफल आयोजन के पश्चात, विभिन्न विशेषज्ञों की एक टीम ये जानने के लिए जुट गई है कि इस भव्य मेले के दौरान किन-किन क्षेत्रों में लापरवाहियां हुईं और क्या चुनौतियां रही। इस टीम को आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, पुलिस ड्यूटी, और टेंट सिटी जैसे कई पहलुओं पर विस्तृत सर्वे करने में लगे हैं। इन विशेषज्ञों का लक्ष्य यह है कि वे महाकुंभ में आपात स्थितियों का विश्लेषण करें और यह पता लगाएं कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से कैसे निपटा जा सकता है।

इस सर्वेक्षण की अगुवाई कर रहे प्रोफेसर डॉ. मुनमुन झा का कहना है कि टीम में शामिल नौ विभागों के विशेषज्ञों का कार्य यह जानना है कि किस प्रकार की तैयारियां की गई थीं और किन स्थानों पर चूक हुई। इससे पहले के महाकुंभों, जैसे नासिक और उज्जैन में, किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा, इस पर भी रौशनी डालने का प्रयास किया जा रहा है। इनमें इलेक्ट्रिकल और कम्युनिकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, टाउन प्लानिंग, स्वास्थ्य और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे विभाग शामिल हैं।

एक महत्वपूर्ण बिंदु ट्रैफिक जाम का अध्ययन भी है, जो महाकुंभ के दौरान शहर में उत्पन्न हुआ था। टीम इस बात का पता लगाएगी कि कैसे 67 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन के कारण ट्रैफिक का प्रबंधन असामान्य हो गया। यह जाम केवल प्रयागराज में नहीं, बल्कि आस-पास के राजमार्गों पर भी देखने को मिला, जिससे श्रद्धालुओं को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ा। टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस प्रकार की उपायों को पहले से लागू किया जा सकता था ताकि इस तरह के भीषण जाम से बचा जा सके।

गंगा की स्वच्छता भी इस सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण विषय है। महाकुंभ के दौरान कुछ दिनों तक गंगा का जल मटमैला हो गया था। इस पर नवीनतम उपायों को तलाशने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान करते समय कोई समस्या न हो। पांटून पुलों की स्थापना और उनके संचालन की दिशा में भी अध्ययन किया जाएगा, क्योंकि महाकुंभ में स्थापित किए गए 30 पांटून पुलों के साथ कई मुद्दों का सामना करना पड़ा।

आईआईटी कानपुर की टीम यह जानने के लिए भी काम कर रही है कि मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में घायलों को इलाज के लिए अस्पताल कैसे पहुंचाया गया। चिकित्सीय स्टाफ, एंबुलेंस और अन्य चिकित्सा सेवाओं की भूमिका का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है। इस संपूर्ण सर्वेक्षण की रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाएगी, जिससे भविष्य में महाकुंभ जैसे आयोजनों में सुधार होगा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।