मोदी सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का विद्रोह, पक्के करने की मांग पर 25 को बड़ी रैली!

**अमृतसर में डेमोक्रेटिक जंगलात मुलाजिम यूनियन की बैठक हुई**

भास्कर न्यूज के अनुसार, अमृतसर में डेमोक्रेटिक जंगलात मुलाजिम यूनियन की राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन रछपाल सिंह जोधानगरी की अध्यक्षता में किया गया। इस बैठक में महासचिव बलबीर सिंह, निर्मल सिंह गुरदासपुर, हरजीत कौर समराला, दीवान सिंह खडूर साहिब, महिंदरपाल दसूहा और दविंदर सिंह कादियान जैसे प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य कच्चे मुलाजिमों की स्थायी नियुक्ति को लेकर चर्चा करना था।

बैठक के दौरान नेताओं ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा फरवरी 2024 में दिए गए फैसले के बावजूद, जिसमें यह निर्देशित किया गया कि 10 साल से अधिक समय तक सेवा कर चुके कच्चे कर्मचारियों को स्थायी किया जाए, सरकार ने डबल बेंच में अपील कर दी है। नेताओं का कहना है कि इस अपील से यह स्पष्ट होता है कि सरकार असल में कच्चे मुलाजिमों को स्थायी करना नहीं चाहती है। इस स्थिति ने कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

इस संबंध में, यूनियन के सदस्यों ने यह तय किया है कि वे 25 मार्च को मोहाली में पंजाब कर्मचारी एवं पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित एक बड़ी रैली में भाग लेकर अपनी आवाज उठाएंगे। इस रैली का उद्देश्य कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को सरकार के समक्ष रखना होगा। यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर वे अंतिम दम तक संघर्ष करते रहेंगे।

बैठक में मौजूद नेताओं ने कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सभी कच्चे कर्मचारियों से अपील की कि वे एकत्रित होकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठाएं। इस पूरे मामले पर नजर रखते हुए, यह महत्वपूर्ण है कि सरकार कर्मचारी कल्याण और न्याय को प्राथमिकता दे, ताकि सभी कर्मचारी बिना किसी चिंता के काम कर सकें।

अंत में, डेमोक्रेटिक जंगलात मुलाजिम यूनियन के सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि वे सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखेंगे और कच्चे मुलाजिमों की स्थायी नियुक्ति की दिशा में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस बैठक ने कर्मचारियों को एक नई ऊर्जा देने के साथ ही उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का भी प्रेरित किया।

यह बैठक ना सिर्फ कच्चे कर्मचारियों के लिए, बल्कि पंजाब के सभी श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि यह प्रदर्शित करता है कि वे अपनी स्थितियों को बदलने के लिए संगठित हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार उनके अधिकारों को मान्यता देती है या उन्हें और संघर्ष के लिए मजबूर कर देती है।