गुरुद्वारा बोहड़ी साहिब से आज निकलेगा भव्य नगर कीर्तन!

**भास्कर न्यूज |** अमृतसर के कोट खालसा स्थित गुरुद्वारा श्री बोहड़ी साहिब में इस वर्ष 86वां होला महल्ला बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और क्षेत्र के संगत के सहयोग से आयोजित इस मेले में शनिवार को श्री अखंड साहिब पाठ के भोग डाले गए, जिसके बाद अरदास की गई। इसके साथ ही अगले पाठों की श्रृंखला शुरू की गई। इस विशेष अवसर पर गुरुद्वारा साहिब के प्रधान, सविंद्र सिंह संधू ने बतलाया कि रविवार को सुबह 10 बजे नगर कीर्तन का आयोजन होगा, जिसमें विशेष रूप से फूलों से सजी गाड़ी में पालकी साहिब पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को विराजमान किया जाएगा।

नगर कीर्तन की शुरुआत “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों के साथ की जाएगी। इसमें पांच प्यारों की अगुवाई में संगत का उत्साह देखने को मिलेगा, जो विभिन्न वाहनों में सवार होकर शामिल होंगे। इस नगर कीर्तन में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी अपनी सक्रिय सेवा निभाएंगे। यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा से प्रारंभ होकर विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए शाम को वापस गुरुद्वारा साहिब में संपन्न होगा।

इसके अतिरिक्त, इलाके के बलबीर सिंह के परिवार ने नगर कीर्तन में फूलों की सेवा का खास जिम्मा लिया है। बलबीर के पारिवारिक सदस्य 2 क्विंटल फूलों के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की गाड़ी को सजाएंगे, जो इस पावन अवसर पर एक आकर्षण का केंद्र बनेगा। होला मोहल्ला के आयोजन के दौरान गुरुद्वारे में लंगर की व्यवस्थाएं भी की गई हैं, ताकि सभी श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध हो सके।

जगह-जगह से संगत के आने से इस साल का होला मोहल्ला और भी खास हो गया है। शनिवार को आयोजित नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की उम्मीद है, जो इस वर्ष के पर्व को और भी भव्य बनाएगी। गुरु के दीवान में संगत की उपस्थिति एकता का प्रतीक है, जो सिख समुदाय की गहरी धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक समरसता को दर्शा रही है।

गुरुद्वारा श्री बोहड़ी साहिब में होकर गुजरने वाला यह नगर कीर्तन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सिख संस्कृति की महत्ता को भी दर्शाता है। इस आयोजन में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी एकता, भाईचारे और सेवा के मूल सिद्धांतों को कुछ इस तरह जीवित रखती है, जो हमारे समाज को और मजबूत बनाती है। इस प्रकार होला महल्ला का उत्सव सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उन्हें उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ता है।