पंजाब सीएम की SKM से अहम बैठक: 5 मार्च को चंडीगढ़ में बड़ा आंदोलन, डल्लेवाल का अनशन 98वें दिन दाखिल।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अपनी कई मांगों को लेकर पांच मार्च से चंडीगढ़ में एक पक्का मोर्चा लगाने की योजना बनाई है। इस संदर्भ में, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज एसकेएम के नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जो कि पंजाब भवन में शाम चार बजे आयोजित होगी। किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करने के लिए यह बैठक आयोजित की जा रही है। किसान सुबह 12 बजे से चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में एकत्र होंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री से मिलने के लिए रवाना होंगे। यदि बैठक में मांगों पर कोई सहमति बनती है, तो किसानों की संघर्ष की रणनीति में बदलाव की घोषणा मीटिंग के बाद की जाएगी।

बैठक में कुल 17 मांगों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें से 13 पहले से ही सरकार द्वारा पूरी करने का आश्वासन दिया गया है। इनमें प्रमुख मांगें शामिल हैं, जैसे कि किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए एक सब कमेटी का गठन, नाबार्ड के किसानों के कर्ज के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना की शुरुआत, और सरकार द्वारा आवारा पशुओं के मुद्दों पर हल निकालने की दिशा में कदम उठाना। इसके अलावा, बिजली के प्री-पेड मीटर, किसानों को राइफल का लाइसेंस देने की सुविधा, और मुआवजे की भरपाई की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, अन्य मुद्दों में सहकारी सभाओं में नए खाता खोलने पर पाबंदी हटाने और गन्ना किसानों के हित में सब कमेटी का गठन शामिल है।

शंभू-खनौरी मोर्चा पर चल रहा किसानों का संघर्ष भी निरंतर जारी है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन इस समय 98वें दिन में प्रवेश कर चुका है। उनकी भूख हड़ताल के 100 दिन पूरे होने पर, पांच मार्च को खनौरी बॉर्डर पर 101 किसान एक दिन की भूख हड़ताल करने वाले हैं। इसके साथ ही, मार्च में पूरे देश में होने वाली किसान महापंचायत का कार्यक्रम भी तय किया जाएगा और इसके लिए एक ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने महिला किसान पंचायत आयोजित करने की घोषणा भी की है।

हाल ही में, बारिश और ओलावृष्टि के कारण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। खासकर, पंजाब के अमृतसर और हरियाणा के अंबाला में सरसों और गेहूं की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस स्थिति को देखते हुए, शंभू मोर्चे के नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि फसलों के नुकसान का उचित और वैज्ञानिक आधार पर शीघ्र मूल्यांकन किया जाए। उनका मानना है कि जैसे पराली जलाने की निगरानी के लिए तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जाता है, उसी तरह फसलों के नुकसान की भी समय पर जानकारी मिलनी चाहिए। साथ ही, किसानों को बिना किसी देरी के उचित मुआवजा देने की पैरवी की गई है।

किसानों की इस सक्रियता और मांगों के लिए उनका एकजुट होना यह दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों के प्रति कितने गंभीर हैं। इस आंदोलन के अंतर्गत, पंजाब और हरियाणा के किसान एकजुट होकर अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में लगे हुए हैं। यह दर्शाता है कि किसानों के मुद्दे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कैसे इन मुद्दों का समाधान करती है और किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।