ऐश्वर्या राय बच्चन, जिन्हें भारतीय सिनेमा की एक बहुपरकारी अभिनेत्री माना जाता है, ने अपने करियर में बेजोड़ भूमिकाओं को निभाया है। वर्तमान में एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने ‘धूम-2’ में एक महत्वपूर्ण किसिंग सीन को लेकर कानूनी विवाद का जिक्र किया है। इस फिल्म में ऐश्वर्या ने ऋतिक रोशन के साथ अभिनय किया था और उनके इस सीन को लेकर कई लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।
साल 2012 में डेली मेल को दिए गए एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया कि उन्होंने कई पश्चिमी फिल्मों की स्क्रिप्ट इसलिए अस्वीकार कर दी थीं क्योंकि उनमें इंटीमेट या किसिंग सीन शामिल थे। ऐश्वर्या ने कहा, “मैं उनके साथ सहज नहीं थी। मैंने सोचा कि पहले मैं अपनी इंडस्ट्री में ऐसा कर लूँगी, और इसलिए मैंने ‘धूम-2’ में ये सीन किया। लेकिन इसके बाद मुझे कानूनी नोटिस भी मिले। कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि आपने हमारी संस्कृति और अपनी छवि का बुरा उदाहरण पेश किया है।”
इस बारे में ऐश्वर्या का यह भी कहना था कि यह सुनकर उन्हें आश्चर्य हुआ कि वह केवल एक कलाकार हैं, जो अपने पेशेवर काम को कर रही हैं। उन्होंने देखा कि कई अन्य अभिनेताओं ने बड़े पर्दे पर किसिंग सीन किया है और ऐसा लगातार कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय समाज में सार्वजनिक स्थानों पर प्रेम प्रदर्शन को सामान्य नहीं माना जाता, जिससे यह स्थिति और भी जटिल हो जाती है। ऐश्वर्या ने कहा, “हमारी फिल्म इंडस्ट्री में भी अभिनेता अक्सर किसिंग सीन में सहज नहीं दिखते। ऐसा करना हमारे कल्चर के अनुकूल नहीं है।”
‘धूम-2’ एक्शन-थ्रिलर फिल्म थी, जो साल 2006 में रिलीज हुई थी और इसने भारतीय सिनेमा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया। इसमें ऐश्वर्या और ऋतिक की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आई थी। फिल्म का निर्देशन संजय गढ़वी ने किया था और इसमें अभिषेक बच्चन, उदय चोपड़ा और बिपाशा बसु जैसी शानदार कास्ट भी शामिल थी।
वर्तमान में, ऐश्वर्या राय बच्चन की हालिया फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन’ है, जिसे मणिरत्नम ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में भी उनके अभिनय को काफी सराहा गया है। ऐश्वर्या राय का यह सफर न केवल उनकी अभिनय क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक कलाकार को अपने निर्णयों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब वे अपने कला के रूप में सीमाओं को तोड़ने का प्रयास करते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि पेशेवर रूप से आगे बढ़ते समय व्यक्तिगत विश्वास भी अहम होते हैं।