घूसखोरी से बदनामी, प्रमोटी IAS-IPS अब कलेक्टर-SP बनने से महरूम!

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से आईएएस-आईपीएस में प्रमोट होने वाले अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी संभालने का अवसर नहीं मिल रहा है। अधिकांश जिलों और संभाग स्तर पर सीधे पदस्थ किए गए आईएएस-आईपीएस अफसरों को तैनात किया गया है। यह स्थिति तब है जब राजस्थान में पहले प्रमोशन से आए अफसर प्रमुखता से जिलों की कमान संभालते थे। अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के शासनकाल में प्रमोटी अफसरों को प्राथमिकता दी जाती थी। गहलोत के पिछले कार्यकाल में, 18 जिलों की जिम्मेदारी प्रमोट किए गए आईएएस अधिकारियों ने संभाली थी, जबकि अब वर्तमान में केवल 11 जिलों पर ही प्रमोटी अफसर हैं।

ब्यूरोक्रेसी के जानकार मानते हैं कि प्रमोशन कोटे के बावजूद प्रमोट हुए अधिकारियों को जिलों की कमान नहीं मिलने का कारण विवादों में उनका नाम आना है। पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमोट किए गए आईएएस अधिकारियों को घूसकांडों में फंसने का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी छवि पर प्रश्नचिन्ह लग गया। उदाहरण के लिए, 2020 में प्रमोट हुए राजेंद्र विजय, हनुमान मल ढाका और इंद्रजीत सिंह राव जैसे अधिकारियों का नाम ऐसे मामलों में आया है, जिसने सरकार के साथ-साथ पुरानी सरकारों की छवि को भी प्रभावित किया है।

राजस्थान में स्वीकृत आईएएस अधिकारियों की कुल संख्या 332 है, जिसमें से केवल 278 ही कार्यरत हैं। इस संख्या को देखते हुए, प्रदेश को 380 से अधिक आईएएस अधिकारियों की आवश्यकता है। वर्तमान में, कुल 41 जिलों में 11 जिलों का प्रबंधन प्रमोटी आईएएस अधिकारियों के पास है, जो गहलोत और वसुंधरा राजे के समय की तुलना में काफी कम है। इस दौरान, 18 से ज्यादा जिलों की कमान प्रमोटी अधिकारियों के हाथ में थी।

गहलोत और वसुंधरा राजे की सरकार के दौरान, प्रमोटी अफसरों को आमतौर पर पिछड़े जिलों में नियुक्त किया जाता था, लेकिन कुछ ने बड़े जिलों में भी अपनी जगह बनाई। हालांकि, वर्तमान में प्रमोटी अधिकारियों को जिले संभालने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी नियुक्ति में प्राथमिकता का पैमाना बदल गया है। रिटायर्ड आईजी सत्यवीर सिंह के अनुसार, प्रमोटी आईएएस अधिकारियों का स्थानीय नेताओं से बेहतर तालमेल होता है, इसलिए नेता उन्हें अपने जिलों में रखना पसंद करते हैं।

प्रमोशन का कोटा भी बढ़ा है, और अब राजस्थान में आईएएस अधिकारियों का कोटा 101 पहुंच गया है, जिसमें 33.5 प्रतिशत पद राज्य सेवा से भरे जाते हैं। इस मोड़ पर, यह आवश्यक है कि प्रमोटी प्रदानियों को समान अवसर देने की दिशा में कदम उठाए जाएं, ताकि उनकी कार्यकुशलता का सही मूल्यांकन किया जा सके। आरएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है कि प्रमोटी अधिकारियों को उनके पदों से वंचित किया जा रहा है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। कुल मिलाकर, राजस्थान में प्रशासनिक तंत्र में प्रमोटी आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का भविष्य वर्तमान में अनिश्चित बना हुआ है।