कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में नॉर्थ इंडिया के वाइस चांसलर का महासम्मेलन, राज्यपाल और शिक्षामंत्री की होगी उपस्थिति!

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज से कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (केयू) में नॉर्थ इंडिया के वाइस चांसलर (VC) का दो दिवसीय नेशनल सेमिनार आरम्भ होने जा रहा है। यह महत्वपूर्ण सेमिनार नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई), हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल (एचएसएचईसी) और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन माननीय राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय द्वारा किया जाएगा। इस सेमिनार का विषय “शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन – विकसित भारत 2047 की दिशा में” निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह केयू के ऑडिटोरियम में होगी, जिसमें चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और निदेशक शामिल होंगे।

सेमिनार के पहले दिन के दौरान शैक्षणिक सत्र के बाद, सभी प्रतिनिधि धरोहर हरियाणा संग्रहालय का दौरा करेंगे और शाम को ब्रह्मसरोवर पर आयोजित होने वाली आरती में भी भाग लेंगे। दूसरे दिन, सेमिनार में बीएड और एमएड पाठ्यक्रमों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति के लाभ, राष्ट्रीय शिक्षा की चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श होगा। इस सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर अपने अनुभव साझा करेंगे, जो शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभवों और विचारों की अदला-बदली का माध्यम बनेगा।

सेमिनार के समापन समारोह में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जो समारोह को संबोधित करेंगे। इस सेमिनार में उत्तर भारत के कई राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित है। समापन सत्र में एनसीटीई और एचएसएचईसी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। यह एनसीटीई का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन है, जो शिक्षक शिक्षा में सुधारों और नये दृष्टिकोणों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस सेमिनार का उद्देश्य न केवल शैक्षणिक चुनौतियों का समाधान खोजना है, बल्कि विभिन्न प्रदेशों के वाइस चांसलरों के बीच सहयोग और संवाद को भी बढ़ावा देना है। उम्मीद की जा रही है कि यह चर्चा शिक्षण संस्थानों के लिए नई नीतियों तथा सुधारों के लिए एक मार्गदर्शक रूप में कार्य करेगी। ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए सहायक सिद्ध होंगे, जो छात्रों और संस्थानों के लिए लाभकारी हो सकते हैं।