आमिर खान की बेटी आयरा का इमोशनल खुलासा: ‘मां-बाप ने खर्चा किया, मैं बेकार हूं!’

आमिर खान की बेटी आयरा खान ने हाल ही में अपने जीवन के कठिन समय और पारिवारिक रिश्तों पर एक महत्वपूर्ण बातचीत की। 23 साल की उम्र में उन्होंने डिप्रेशन के शिकार लोगों की मदद के लिए अगास्तु फाउंडेशन की स्थापना की थी। अपने अनुभवों को साझा करते हुए आयरा ने कहा कि वह अक्सर अपने 26 साल के होने और कमाई न करने के कारण आत्म-सम्मान को खोने लगी थीं। उन्हें लगता था कि वह बेकार हैं, और उनके लिए यह भावनाएँ बहुत परेशान करने वाली थीं। इस संबंध में आयरा ने पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में आमिर खान का भी जिक्र किया।

इंटरव्यू के दौरान जब आयरा से पूछा गया कि क्या पेरेंट्स को माफ करना आसान है, तो उन्होंने आमिर की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह अपने पिता को उतना दोष नहीं देती जितना वे खुद पर लेते हैं। आयरा का मानना है कि उनकी समस्याएँ उनसे जुड़ी हैं, और उन्हें अपने गुस्से को व्यक्त करने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि उनके अंदर बहुत सारा गिल्ट और डर है, जो उनकी मानसिकता को प्रभावित कर रहा है। जब आयरा से पूछा गया कि इस गिल्ट का कारण क्या है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि उनके माता-पिता ने उन पर बहुत पैसे खर्च किए हैं, और वे इस समय किसी भी दृष्टि से नाकामयाब हैं।

आमिर ने उनकी बातों को सुनकर आयरा को याद दिलाया कि उन्होंने 23 साल की उम्र में अगास्तु फाउंडेशन की स्थापना की थी, जो वास्तव में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस वार्तालाप में आमिर ने यह भी बताया कि जब उन्होंने रीना दत्ता से तलाक लिया, तो वे स्वयं एक मैरिज काउंसलर के पास गए थे। यह उन सभी चीजों को देखकर प्रतीत होता है कि आमिर और आयरा दोनों ही मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग का महत्व कितना बड़ा है।

आयरा ने खुलासा किया कि जब वह सिर्फ 12 साल की थीं, तब उनकी मां ने उन्हें पहली बार काउंसलिंग के लिए भेजा था। हालांकि, उन्होंने काउंसलिंग में जाने से इनकार करने की इच्छा जताई, लेकिन अंततः केवल उस इनकार के डर से उन्हें तीन साल तक थैरेपी का सहारा लेना पड़ा। आयरा के अनुभव बताते हैं कि बचपन की मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतें कितनी महत्वपूर्ण होती हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

इन बोधिसत्वों के जरिए आयरा खान ने न केवल अपनी व्यक्तिगत लड़ाई पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि साथ ही समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी लगा हुआ है। यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और इस पर खुलकर बात करें। आयरा की कहानी इस दिशा में प्रेरणादायक है और उनकी पहल निश्चित रूप से कई लोगों को प्रोत्साहित कर सकती है।