जोधपुर के पाल बाइपास क्षेत्र स्थित मानसरोवर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक विशेष शाखा के उद्घाटन के लिए आयोजित समारोह में डॉ. रामप्रसाद महाराज और वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल बाबाजी ने ध्वज प्रदान किया। इस समारोह में किशोरसिंह राठौड़ ने अध्यक्षता की। बाबाजी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न जातियों, क्षेत्रों और राज्यों से आए लोग एकत्र होकर सामूहिक जीवन जीने की आवश्यकता को समझते हैं। उन्होंने चेताया कि जब सामाजिक समरसता का अभाव होता है, तो समाज और देश दोनों ही कठिनाइयों का सामना करते हैं, जैसे कि वर्तमान में चीन और रूस की स्थिति दिखा रही है।
वे बोले कि हमारे देश में भी लोगों के बीच सामाजिक बंधनों का विघटन हो रहा है, जो चिंताजनक है। आज के समय में पारिवारिक रिश्ते कमजोर हो रहे हैं और पारंपरिक संबंधों, जैसे बुआ, चाची, मामा और मामी जैसे शब्द लुप्त होते जा रहे हैं। बाबाजी ने इसे जीवन के लिए घातक बताया और कहा कि इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका मानना था कि परिवारों में आपसी तालमेल और समस्याओं का समाधान किए बिना पारिवारिक संरचना में कमी आ रही है।
डॉ. रामप्रसाद महाराज ने बताया कि भक्ति की शक्ति परिवारों में एकता और समर्पण को बढ़ाती है। यदि परिवारों में भजन और भोजन की प्रथा को बढ़ावा दिया जाए, तो पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे। उन्होंने जोड़ा कि जो व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर चलता है, वह कभी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाता और ऐसी व्यक्ति समाज के उत्थान में मददगार साबित होता है।
इस विशेष अवसर पर नगर संघ चालक राम गहलोत ने उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। समारोह की शुरुआत मानेसर महादेव मंदिर से 51 मातृ शक्ति द्वारा कलश यात्रा और 36 स्वयंसेवकों के पथ संचलन से हुई। कार्यक्रम में महानगर सह कार्यवाह अशोक, महानगर कुटुंब प्रबोधक गणेश, नगर कार्यवाह भरत और सह कार्यवाह दीपक शामिल रहे।
समारोह में कई नए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई। धनराज भाटी को मुख्य शिक्षक और खुशालसिंह राजपुरोहित को कार्यवाह के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों में देवीलाल पालीवाल को नगर संयोजक, राजेंद्र शर्मा को बस्ती प्रमुख, किशन माथुर को सह प्रमुख, कर्नल भीमगिरी गोस्वामी को कुटुंब प्रबोधक, गोपाल शर्मा को पर्यावरण संयोजक, और सुरेंद्रपाल शर्मा को धर्म जागरण एवं सामाजिक समरसता का दायित्व सौंपा गया है।
यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया, बल्कि इसे पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। इस समारोह ने सभी सहभागियों को एकजुट होकर समाज सेवा की दिशा में अग्रसर होने का संदेश दिया।