प्रयागराज IIIT: राहुल की मौत से बिखरा मेंटर अखिल, सुन-बोल नहीं सकता था छात्र!

प्रयागराज में बीटेक के छात्र राहुल चैतन्य और उसके साथी अखिल की दुखद कहानी ने सभी को हिलाकर रख दिया है। अखिल ने राहुल के जीवन में एक संजीवनी का काम किया। राहुल, जो सुन और बोल नहीं सकता था, के लिए कॉलेज में किसी भी तरह का मदद प्रदान नहीं किया गया था। ऐसे में अखिल ने न केवल दोस्ती निभाई, बल्कि उसे पढ़ाई में भी सहायता दी। राहुल की परेशानियों को समझते हुए अखिल ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह उसे कठिनाइयों से निकाल सके। हालांकि, 28 मार्च को अखिल की अचानक मौत ने राहुल को गहरे सदमे में डाल दिया। इस घटना के बाद राहुल ने आत्महत्या का कदम उठाया, जिसे उसके साथियों और परिवार ने समझ नहीं पाया।

राहुल और अखिल की दोस्ती का सफर काफी रोमांचक था। रोहित राव, जो कि अपने दोस्तों के बारे में बताते हैं, कहते हैं कि जब राहुल के अंक कम आ रहे थे, तब अखिल ने उसका सहारा बनकर उसकी पढ़ाई में मदद की। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि एक-दूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया। छात्र जीवन की इसी मुश्किल समय में अखिल की बीमारियों ने स्थिति को और भी कठिन बना दिया। वह अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी राहुल की चिंता करने लगा। मगर दुर्भाग्यवश, उसकी जान नहीं बच सकी और इससे राहुल की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा।

जब अखिल की मौत की खबर राहुल तक पहुँची, तो वह पूरी तरह से टूट गया। उसके कमरे में अंतिम बार उसे अकेले देखा गया था। कहा गया है कि उसने अंतिम समय में अपनी मां को संदेश भेजकर अपनी परेशानियों के बारे में बताया। उसने यह भी कहा कि वह अपने छोटे भाई अभिराम का ध्यान रखने के लिए कह रहा था। इसके बाद उसके आत्महत्या के कदम ने सबको चौंका दिया। कॉलेज के छात्रों ने इस घटना के खिलाफ आंदोलन कर दिया और कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए।

राहुल की माता स्वर्णलता और परिवार के अन्य सदस्य जब पोस्टमॉर्टम के बाद डॉक्टर से मिले, तो उन्होंने इस पूरी घटना पर सवाल उठाए। उन्हें यह समझने में कठिनाई हो रही थी कि कॉलेज ने उनके बेटे की समस्याओं का ध्यान क्यों नहीं रखा। इससे स्पष्ट होता है कि शिक्षा संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य और छात्रों की भलाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। कॉलेज के निदेशक ने कहा कि इस दुखद घटना की जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी, और नुकसान की भरपाई के लिए छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

इस घटना ने न केवल छात्रों को प्रभावित किया, बल्कि समाज में भी एक नया सवाल खड़ा किया है कि क्या हमारे शिक्षा संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का सही तरीके से ध्यान रखा जा रहा है। छात्रों के आंदोलनों से यह स्पष्ट है कि वे अपनी आवाज उठाना चाहते हैं और किसी और के साथ ऐसा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।