सुरक्षा खतरे में! जिले के 993 प्राइमरी स्कूल बिना गार्ड के!

**लुधियाना: सरकारी स्कूलों की सुरक्षा पर उठे सवाल**

अमित कुमार | लुधियाना: हाल ही में पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में परिवर्तित करने का जो वादा किया है, उसकी वास्तविकता कुछ और ही दर्शा रही है। शुक्रवार को लुधियाना के भामिया गांव स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल से एक छोटी बच्ची अचानक लापता हो गई। कई कोशिशों के बाद उसे ढूंढा गया, लेकिन यह घटना सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को स्पष्ट रूप से उजागर कर गई है। जिले में 1527 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 993 स्कूल प्राइमरी स्तर के हैं, लेकिन इनमें से किसी को भी आज तक सुरक्षा गार्ड मुहैया नहीं कराया गया है।

प्राथमिक स्तर के स्कूलों में सुरक्षा की कमी चिंता का विषय बन गई है। यह जानना दिलचस्प है कि सेकेंडरी स्कूलों को सुरक्षा गार्ड प्रदान किया गया है, जबकि प्राइमरी स्कूल अब भी इस जरूरी सुविधा से वंचित हैं। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश जारी किया है, जिसके लिए फंड भी आवंटित किया जाता है। फिर भी, कई स्कूलों में ये कैमरे कार्यशील नहीं हैं या फिर केवल दिखावे के लिए स्थापित हैं। भामिया स्कूल की जांच में यह तथ्य सामने आया कि वहां कई कैमरे बंद पड़े थे।

इस स्थिति पर डीईओ प्राइमरी, रविंदर कौर ने स्वीकार किया कि प्राइमरी स्कूलों में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर मंत्रालय को बार-बार अनुरोध भेजे गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने स्कूलों को निर्देशित किया है कि सुबह स्कूल खोलने के साथ ही गेट बंद कर दिए जाएं और केवल अभिभावकों को ही बच्चों को सौंपा जाए। इसके साथ ही छुट्टी के समय एक शिक्षक को गेट पर मौजूद रहना आवश्यक किया गया है। कौर ने यह भी बताया कि कैमरों की स्थिति की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों की होगी।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि प्रशासन और सरकार की उदासीनता बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हाल के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर संबंधित संस्थाएं गंभीर नहीं हैं। यदि किसी बच्चे को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? जब सरकार स्मार्ट स्कूलों का नाम देती है, तो उसमें सुरक्षा जैसे मूलभूत सुविधाओं का होना अनिवार्य है।

लोगों का आरोप है कि इस घटना ने एक बार फिर से यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग और सरकार केवल कागज़ों तक सीमित हैं, जबकि वास्तविकता में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। भामिया की घटना ने एक बार फिर से न केवल स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा किया है, बल्कि यह धारणा भी बनाई है कि स्मार्ट स्कूलों का सपना सिर्फ कागजी है, जबकि सच्चाई जमीन पर कहीं और ही है।