मातृ दिवस के विशेष मौके पर शिल्पी फाउंडेशन द्वारा “सांसों की सरगम है मां” नामक एक सांस्कृतिक आयोजन का आयोजन द ग्रैंड सफारी, गोपालपुरा में किया गया। इस अवसर पर बेटियों ने मंच पर आते हुए अपनी मां से जुड़ी यादों और अनुभवों को साझा किया, जिससे दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए। यह आयोजन न केवल भावनात्मक था, बल्कि मातृत्व के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक बेहतरीन माध्यम भी बना।
कार्यक्रम की एक विशेषता यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 21 प्रेरणादायक महिलाओं को विशेष सम्मान से नवाजा गया। ये महिलाएं पत्रकारिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज सेवा, कला और कानून जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने कार्यों के जरिए समाज में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं। मुख्य अतिथि जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने इस आयोजन के दौरान कहा, “मां केवल एक रिश्ता नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत अनुभव है जो जीवनभर हमारे साथ चलता है।” उन्होंने इस तरह के आयोजनों को समाज में संवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों का संवर्धन करने का महत्वपूर्ण एक साधन बताया और इसके सकारात्मक प्रभाव की सराहना की।
सोशल मीडिया और आधुनिकता के इस दौर में भी इस कार्यक्रम ने पारिवारिक मूल्यों और मातृत्व के महत्व को प्रमोट किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रैंप वॉक ने इस कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। विशेष रूप से बेटियों द्वारा मां को समर्पित नृत्य-गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस समारोह में भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष अमित गोयल, विधायक गोपाल शर्मा, समाजसेवी पवन गोयल और अन्य प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिन्होंने इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
शिल्पी फाउंडेशन की अध्यक्ष, शिल्पी अग्रवाल ने इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि यह मातृत्व और नारी शक्ति को समर्पित था। संरक्षक सुनीता अग्रवाल ने बताया कि इस मौके पर आयोजित टॉक शो में कई महिलाओं ने अपनी जीवन यात्रा को साझा किया, जिससे अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिली। सम्मानित की गई महिलाओं में प्रभा शर्मा, शोभा गोयल, एडवोकेट ज्योति सिंह और डॉ. आरती माहेश्वरी जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल थीं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्यों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
इस प्रकार, यह आयोजन सिर्फ मातृ दिवस का उत्सव नहीं बल्कि मातृत्व, नारी शक्ति और समाज में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देने का एक उपयुक्त माध्यम बन गया, जो न केवल हृदय को छूने वाला था, बल्कि एक प्रेरणादायक संदेश भी देने में सफल रहा।