अमृतपाल सिंह के खिलाफ साजिश: हाईकोर्ट की शरण लेगा परिवार, विरोधियों में खौफ!

असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खालिस्तान समर्थक और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह, जिन पर पहले ही दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया है, अब तीसरी बार इस कानून के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। अमृतपाल के परिवार ने इस विषय पर अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। परिवार का तर्क है कि अमृतपाल सिंह को जानबूझकर जेल में रखा जा रहा है ताकि उन्हें राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जा सके। उनके अनुसार, अमृतपाल की बढ़ती लोकप्रियता से विभिन्न राजनीतिक दलों में चिंता बढ़ गई है, जिसके परिणामस्वरूप उन पर यह कठोर कार्रवाई की गई।

पंजाब में हाल ही में संपन्न चुनावों में अमृतपाल सिंह ने सबसे अधिक मतों से विजय प्राप्त की थी, जो यह संकेत देती है कि उनकी स्वीकार्यता जनता के बीच बढ़ रही है। परिवार का आरोप है कि अमृतपाल को जेल में डालकर इस पराधीनता का शिकार बनाया जा रहा है, जबकि वे बाहर आकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकते हैं। परिवार ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई सिर्फ संविधान का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इसे राजनीतिक दबाव के तहत भी समझा जा सकता है। उनका मानना है कि अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी राजनीतिक दलों के लिए खतरा बन गई है, क्योंकि उनकी जड़ें चुनावी मैदान में मजबूत हो रही हैं।

अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद से 23 अप्रैल 2023 से वह हिरासत में हैं। उन पर एनएसए लागू करने का निर्णय सरकार द्वारा उनके कार्यों को राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा मानने के बाद लिया गया था। उनके खिलाफ कानून के तहत यह कार्रवाई निरंतर बढ़ाई गई है। अब उनकी हिरासत की अवधि को और लंबे समय तक बनाए रखने पर विचार चल रहा है, जो परिवार के लिए चिंता की बात है। अमृतपाल ने अपने वकील के माध्यम से कहा है कि उनकी बात कहने की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है।

अमृतपाल के वकील ने इस बात पर जोर दिया है कि यदि उन्हें बिना किसी ठोस आधार के जेल में रखा जा रहा है तो यह लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। इसका प्रभाव यह है कि राजनीतिक दल इसे अपनी हार के रूप में देख रहे हैं। दरअसल, यह एक ऐसा मामला है जो अब बोलने की स्वतंत्रता पर खड़ा हो गया है। अमृतपाल सिंह की स्थिति इस समय कई राजनीतिक प्रश्नों को भी जन्म देती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार विभिन्न पक्षों के लिए यह मुद्दा संवेदनशील बन गया है।

शासन और व्यवस्था की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण मामला है, और आने वाले समय में यह देखना होगा कि उच्च न्यायालय इस चुनौती का कैसे जवाब देता है और क्या अमृतपाल सिंह को राहत मिल पाती है या नहीं। इस विवाद ने न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है, और सभी की नजरें अब इस कानूनी लड़ाई पर टिक गई हैं।