गुरदासपुर: शिवसेना नेता हरविंदर गिरफ्तार, पुलिस पर डॉक्यूमेंट फेंकने का आरोप!

गुरदासपुर में एस शिवसेना (बाल ठाकरे) के उपाध्यक्ष हरविंदर सोनी को पुलिस के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया है। सिटी थाना पुलिस के अनुसार, बुधवार सुबह थाना प्रभारी दविंदर प्रकाश और अन्य पुलिसकर्मी सोनी की सुरक्षा की स्थिति का आकलन करने उनके निवास पर पहुंचे थे। उस दौरान हरविंदर सोनी ने एक पुलिस कर्मी पर कागजातों का ढेर फेंक दिया और अधिकारियों को अपशब्द कहने के साथ-साथ धमकी भी दी।

इस मामले में सोनी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उनकी गिरफ्तारी की खबर सुनते ही उनके समर्थक थाने के बाहर पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। यह आरोप भी लगाया गया है कि सोनी ने अपने सुरक्षाकर्मियों को पीने का पानी तक नहीं दिया। इससे पहले, उनके सुरक्षा विवरण में तैनात पुलिसकर्मियों ने उच्चाधिकारियों को शिकायत की थी जिसमें कहा गया था कि सोनी ने न केवल पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उनके द्वारा मुहैया करवाई गई सुविधाओं का भी दुरुपयोग किया था। वह पुलिस द्वारा दिए गए ड्राइवर का इस्तेमाल अपने निजी कार्यों में करते थे।

हरविंदर सोनी, जो कि लंबे समय से सिख कट्टरपंथियों की हिट लिस्ट में शामिल हैं, को पहले भी सुरक्षा प्रदान की गई है। 13 अप्रैल 2015 को, एक सिख युवक कश्मीर सिंह ने उनके ऊपर फायरिंग की थी, जिसके चलते उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना के बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें उच्चस्तरीय सुरक्षा मुहैया करवाई, जिसमें 20 से अधिक सुरक्षा कर्मी हर समय उनके साथ रहते हैं। पिछले साल नवंबर में उन्हें कुछ निहंग सिखों के साथ झगड़े के बाद गुरदासपुर-बटाला रोड पर उनके घर से गिरफ्तार किया गया था।

सोशल मीडिया पर भी हरविंदर सोनी ने पुलिस प्रशासन की कुछ नकारात्मक टिप्पणियाँ की थीं, जिससे उनकी छवि और भी विवादित हो गई थी। इस प्रकार का व्यवहार न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए हानिकारक है, बल्कि सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं को भी जन्म देता है। सोनी की यह गिरफ्तारी और पुलिस के साथ उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए कानून और व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाना आवश्यक है।

गुरदासपुर के इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचलों को भी जन्म दिया है और इसे कानून व्यवस्था की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सोनी अपनी राजनीतिक स्थिति को फिर से स्थापित कर पाएंगे या यह घटना उनके लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।