शराब की लत से जूझती ऋतिक की बहन सुनैना, रिहैब सेंटर पहुंचीं, शरीर पर चोट के निशान!

ऋतिक रोशन की बहन सुनैना रोशन ने हाल ही में अपने ऐल्कोहॉल एडिक्शन और इससे मुक़ाबला करने की अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा के विषय में खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय पर शराब ने उनकी जिंदगी को इस कदर प्रभावित किया कि वह बार-बार गिर जाती थीं, जिससे उनके शरीर पर चोट के निशान आ जाते थे। इसके बाद, उन्होंने अपने माता-पिता से यह बात साझा की कि उन्हें रिहैब में जाने की आवश्यकता है। पिंकविला को दिए गए इंटरव्यू में सुनैना ने बताया कि यह एहसास उन्हें तब हुआ जब उन्होंने अपने शरीर पर सजग होकर देखा कि वह बिस्तर और कुर्सी से गिरकर दर्द में जी रही हैं।

सुनैना ने स्पष्ट किया कि वह कई गंभीर बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर और हर्पीज से जूझते हुए थक गई थीं, और इसी कारण से उन्होंने शराब का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “जब मैं लड़ती रही तो मुझे अकेलापन महसूस हुआ। मुझे लगा कि शराब ही उस दर्द को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।” यह स्थिति धीरे-धीरे विकसित हुई और उनका शरीर और अधिक शराब की मांग करने लगा, जिसे वह समझ नहीं पाईं कि कब उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई।

सुनैना ने अपने रिहैब के अनुभव को साझा किया और बताया कि कैसे वहां पर उन्हें 6-7 घंटे तक पूछताछ का सामना करना पड़ा। रिहैब में केवल शराब ही नहीं, बल्कि परफ्यूम, चॉकलेट और अन्य किसी भी प्रकार की चीज़ों का सेवन प्रतिबंधित था, जो किसी तरह की लत का कारण बन सकता था। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया कठिन थी, लेकिन उन्होंने अपने परिजनों से कहा कि वह भारत में नहीं, बल्कि विदेश में रिहैब जाएंगी ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सके।

लंबे संघर्ष और कठिनाइयों के बाद अब सुनैना ने अपनी शराब की लत से छुटकारा पा लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह यात्रा उनके लिए आसान नहीं थी लेकिन अंततः उन्होंने खुद को एक नई शुरुआत करने का साहस दिखाया। आज वह आत्म-सम्मान के साथ एक नई जिंदगी जी रही हैं और अपने अनुभवों को लोगों के साथ साझा करके उन्हें जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं।

सुनैना की यह कहानी न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत की गाथा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार व्यक्ति आत्म-सम्मान की ओर कदम बढ़ा सकता है, भले ही कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों। उनका अनुभव प्रेरणादायक है और यह अन्य लोगों के लिए भी सीखने का अवसर प्रदान करता है कि लत से लड़ने की कोशिश कभी भी व्यर्थ नहीं जाती।