भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत चल ही रही थी कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जीरो टैरिफ का एक अजीब दावा कर सभी को चौंका दिया। ट्रम्प ने 15 मई को कहा कि भारत ने उन्हें यह प्रस्ताव दिया है कि वह अमेरिकी सामानों पर सभी टैरिफ खत्म करने को तैयार है। हालांकि, भारत सरकार के तरफ से इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस मामले में अमेरिका की यात्रा पर हैं। आइए देखें कि जीरो टैरिफ का अर्थ क्या है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
जीरो टैरिफ का मतलब होता है किसी विदेशी वस्तु पर बिना किसी टैक्स या शुल्क के देश में प्रवेश देना। उदाहरण के तौर पर, अगर भारत अमेरिका से 1,000 रुपये की बादाम मंगवाता है, जिस पर 50% टैरिफ है, तो इसका कीमत 1,500 रुपये हो जाएगा। यदि जीरो टैरिफ समझौता होता है, तो ये बादाम भारत में 1,000 रुपये में ही मिल पाएगी, जिससे अमेरिकी बादाम की बिक्री में वृद्धि होगी। हालाँकि, इससे स्थानीय बाजार को नुकसान भी हो सकता है, क्योंकि घरेलू उत्पाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सस्ते सामान का मुकाबला नहीं कर पाएँगे, जिससे घरेलू उद्योगों के बंद होने और बेरोजगारी के बढ़ने की संभावना होती है। इसके अलावा, सरकार को भी राजस्व का नुकसान होगा।
इस संदर्भ में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रम्प के दावे को खारिज कर दिया है, यह बताते हुए कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी भी जारी है और यह एक जटिल प्रक्रिया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। एक विशेषज्ञ के अनुसार, ट्रम्प का यह बयान भारत पर दबाव डालने के लिए हो सकता है। वहीं, दूसरी ओर, यह भी बताया जा रहा है कि भारत ने पहले चरण में अमेरिकी आयात पर 60% जीरो टैरिफ का प्रस्ताव रखा है, जिसे भविष्य में 90% तक बढ़ाया जा सकता है।
अमेरिकी सामानों पर जीरो टैरिफ लगाने से भारत को कुछ नुकसान हो सकते हैं। इसका संभावित प्रभाव यह हो सकता है कि भारतीय किसान आत्मनिर्भरता खो सकते हैं, सरकारी राजस्व में कमी आ सकती है, और घरेलू उद्योग ठप हो सकते हैं। इसके साथ ही, यह भी संभावना है कि रुपये की वैल्यू डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकती है। इसके बावजूद, अगर जीरो टैरिफ लागू होता है, तो ग्राहकों को कुछ समय के लिए अमेरिकी सामान सस्ता मिल सकता है, जैसे पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद।
भारत की इस स्थिति पर विचार करते हुए, कई आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत सरकार राय बनाने में सावधानी बरत रही है। ट्रम्प के दबाव में आकर टैरिफ खत्म कर देना आसान नहीं होगा। यह महत्वपूर्ण है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखते हुए किसी निर्णय पर पहुंचे, जिससे घरेलू बाजार की सुरक्षा हो सके। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा से संबंधित बातचीत से यह तय होगा कि भारत अपनी व्यापार नीति किस दिशा में आगे बढ़ाएगा।
डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीति और उनके बयानों की गहराई से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि व्यापार के लाभ और हानि दोनों पर आगे चलकर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा कर सके।