मशहूर हिंदी लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के हिंदुओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जनरल मुनीर को एक बेहद संवेदनहीन व्यक्ति बताया, जो अपनी जातीय और धार्मिक पहचान को लेकर आक्रामकता का प्रदर्शन कर रहा है। जावेद अख्तर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर किसी को भारतीय पसंद नहीं हैं तो यह उनकी व्यक्तिगत समस्या हो सकती है, लेकिन वह हिंदुओं को क्यों अपमानित कर रहे हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की कोई इज्जत नहीं होनी चाहिए, भले ही उनकी संख्या कम हो।
एक प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल के यूट्यूब चैनल पर बातचीत करते हुए, जावेद अख्तर ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की सरकार और सेना के गलत बर्ताव का प्रभाव वहां के नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत का विरोध केवल पाकिस्तान की सरकार, सेना और आतंकवादियों से है, न कि वहां के आम नागरिकों से। जावेद अख्तर ने स्पष्ट किया कि हर देश के अंदर अच्छे और बुरे लोग होते हैं और पाकिस्तान में भी ऐसे लोग हैं जो शांति की कामना करते हैं, लेकिन उनके नीतिपरक और सर्वसामान्य नेता उन्हें बार-बार भड़काते हैं।
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और पाकिस्तान के भीतर आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया गया। यह कार्रवाई चार दिन तक चली और इसके बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ। जनरल मुनीर के दिए गए भड़काऊ बयान पर जावेद अख्तर ने गहरा रोष व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सोच, संस्कृति और रीति-रिवाज हिंदुओं से पूरी तरह भिन्न हैं, जबकि इस तरह के बयान आतंकवादियों को बढ़ावा देने वाले माने जाते हैं।
जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के इतिहास पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी मिसाइल का नाम ‘अब्दाली’ रखता है, जिसने खुद मुसलमानों पर हमले किए थे। क्या यह गर्व की बात है? उनके अनुसार, पाकिस्तान का इतिहास और भूगोल दोनों ही विवादास्पद हैं। उन्होंने करगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारतीय सैनिकों ने अपने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी, तो दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना ने अपने सैनिकों के शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ऐसे में भारतीय सेना ने उन शवों को सम्मानपूर्वक दफनाया, जो यह दर्शाता है कि संवेदनशीलता और मानवता का स्तर किस प्रकार अलग है।
इस संवाद में जावेद अख्तर ने न केवल पाकिस्तान में धार्मिक भेदभाव की आलोचना की, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच की खाई को भी कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के लोग एक साथ मिलकर शांति और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।