राजा राममोहन राय की जयंती के अवसर पर जोधपुर के राजकीय सुमेर सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में गुरुवार को “सार्वजनिक पुस्तकालय दिवस” समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, जिन्होंने राजस्थान पुस्तकालय संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं, डॉ. आनंद व्यास ने संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालय समाज की आत्मा के समान हैं। वह एक माँ की तरह हैं, जो पुस्तकों के माध्यम से पाठकों को ज्ञान और संस्कार प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में वाकपीठ के जिलाध्यक्ष और अध्यक्ष घनश्याम लक्षकार ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि विश्व के अनेक महान व्यक्तित्व पुस्तकालयों से जुड़े रहे हैं और ये पुस्तकालय सार्वजनिक सेवा का निरंतर केंद्र हैं, जो ज्ञान का प्रचार करते हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आकांक्षा पालावत, जो सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, जोधपुर की सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हैं, ने अपने संबोधन में पुस्तकालयों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय के लिए पुस्तकों की आवश्यकता होती है और दिशा-निर्देश के लिए पुस्तकालय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आकांक्षा ने पुस्तकों को जीवन में शामिल करने की अपील करते हुए यह कहा कि अच्छी पुस्तकें एक गुरु के जैसे होती हैं, जो सही मार्ग पर चलने में सहायता करती हैं। जोधपुर के सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी श्री प्रशांत सिंह ने भी पुस्तकालयों के महत्व को समझाया, उन्होंने कहा कि ये मानसिक पोषण का केंद्र बन चुके हैं। चाहे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हो या मानसिक तनाव से मुक्ति पाना, योग या अध्यात्म की आवश्यकता, हर समाधान का आरंभ पुस्तकालयों से होता है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में “पिक अ बुक” प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस प्रतियोगिता में नंदिनी ने पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि समरा और अदीब को दूसरे स्थान पर रखा गया। तीसरे स्थान पर पंकज, अभिनव और नंदीवंर्धन का नाम आया। इस प्रतियोगिता ने प्रतिभा को मंच प्रदान किया और दर्शाया कि किस तरह युवा पीढ़ी पुस्तकालय से प्रेरित होकर अपने ज्ञान की वृद्धि कर सकती है।
आखिर में, कार्यक्रम के समापन पर जगदम्बा सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने न केवल पुस्तकालयों के महत्व को उजागर किया, बल्कि विद्यार्थियों और समाज के लोगों को पुस्तकालयों से जुड़ने और ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित करने का कार्य भी किया। ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि समाज में ज्ञान का प्रसार हो और लोग साहित्य के प्रति जागरूक रहें।