भारतीय सेना के विशिष्ट ऑपरेशन ‘सिंदूर’ ने देशभर में दो महिलाओं के नामों को चर्चा का विषय बना दिया है। ये महिलाएं हैं कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह, जिन्होंने 7 मई को इसकी मीडिया ब्रीफिंग में भाग लिया। कर्नल सोफिया का जन्म कानपुर में हुआ था और उनका अधिकतर बचपन मुरादाबाद और घाटमपुर में बीता है। उनकी मां का नाम हलीमा है, और वे मैरिज के बाद मध्यप्रदेश के नौगवां में बस गईं। सोफिया का परिवार पूरी तरह से सेना में रुचि रखने वाला रहा है। उनके पिता ताज मोहम्मद भी सेना में काम कर चुके हैं। उनका ये जज्बा बुआ आयशा बेगम द्वारा भी बताया गया, जो कहती हैं कि सोफिया ने हमेशा अपने जीवन का लक्ष्य सेना में सेवा करने का रखा।
लहुरीमऊ गांव में सोफिया के ननिहाल की यात्रा पर, लोगों ने बताया कि कैसे सोफिया बचपन में भी अपने दोस्तों से अलग, सेना की बातें करती थी। आयशा बेगम ने बताया कि जब बाकी बच्चे खेल के बारे में बात करते थे, सोफिया हमेशा बॉर्डर पर देश की सुरक्षा करने की ख्वाहिश रखती थीं। सोफिया और उनकी जुड़वां बहन सायना बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। उनके चचेरे भाई शहजाद ने कहा कि सोफिया ने साबित कर दिया है कि बेटियां सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभाल सकती हैं।
गांव के पड़ोसी शरीफ के अनुसार, सोफिया हमेशा समझदार और साहसी रही हैं। उनकी ऑनलाइन गतिविधियों और सामरिक अध्ययन की वजह से वे बचपन से ही बंदूक चलाने में रुचि रखती थीं। अब मुरादाबाद में उनकी बुआ हाजरा बेगम ने बताया कि सोफिया की प्रेरणा उनके परिवार के अन्य सैन्य सदस्यों से मिली थी। हाजरा ने यह भी कहा कि उनका सपना बचपन से ही सेना में जाने का था, और यह कि 1996-97 में उन्होंने सेना में चयन पा लिया था।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका के नेतृत्व में अंजाम दिया गया, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 100 से अधिक आतंकियों को खत्म कर दिया। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले के पश्चात की जवाबी कार्रवाई थी, जहां 26 पर्यटकों की हत्या की गई थी। इस मिशन के दौरान सटीक निशानों पर 24 मिसाइलें दागी गईं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में भारत पर कोई आतंकी हमला होता है तो इसे युद्ध का एक रूप माना जाएगा।
कर्नल सोफिया कुरैशी सिग्नल कोर में कार्यरत हैं, जो आर्मी कम्युनिकेशन में माहिर हैं। उनके कामों की सूची में शामिल है कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन और पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ राहत कार्य। उनके कार्यों को सराहा गया है और उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिल चुके हैं।
इस प्रकार, ऑपरेशन ‘सिंदूर’ न केवल एक सैन्य कार्यवाही थी, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का प्रतीक भी बन गया है, जो दिखाता है कि आज की महिलाएँ किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।