NEET छात्रा ने एग्जाम से पहले किया सुसाइड: परिवार के बीच कमरे में मिला फंदे पर लटका शव!

कोटा स्थित एजुकेशन सिटी से एक और दुखद घटना सामने आई है, जहां एक नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या कर ली। कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के पार्श्वनाथ पुरम इलाके में हुई इस घटना ने सभी को हिला कर रख दिया है। छात्रा ने नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी और एक दिन पहले ही उसने अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर जान दे दी। कुन्हाड़ी थाना के अधिकारी अरविंद भारद्वाज ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और छात्रा के परिजनों से पूछताछ की जा रही है।

परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखदायी है। छात्रा के माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य इस दुःख की घड़ी में सदमे में हैं। जानकारी के अनुसार, मृतक छात्रा का परिवार मध्य प्रदेश के श्योपुर क्षेत्र से कोटा में बस गया था। छात्रा ने अपने कमरे में एक चुन्नी के साथ फंदा लगाकर आत्महत्या की। जब इस घटना का पता चला, तो पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रा को तुरंत एमबीएस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

पुलिस ने मृतक छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। पोस्टमार्टम के बाद छात्रा के शव को परिवार को सौंपा जाएगा। इस घटना की जांच करते हुए पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि आत्महत्या का कारण क्या रहा, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हाल के दिनों में कोटा में छात्रों के आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय बन चुकी है। बीते महीने की शुरुआत में भी बिहार से आई एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के कारण छात्रों पर तनाव बढ़ता जा रहा है। नीट परीक्षा जैसे प्रतिस्पर्धी मौकों को लेकर छात्रों पर मानसिक दबाव इतना अधिक होता है कि वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। कोटा में छात्रों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता भी बढ़ रही है। बच्चों के मनोबल को बढ़ाने सहित उनके मानसिक स्वास्थ्य की देखरेख के लिए विशेष कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित करने की मांग की जा रही है।

हाल ही में कोटा में चार आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, जिससे यह अंदाजा लगता है कि संकट गहराता जा रहा है। अब तक 2025 में कोटा में 14 छात्रों ने आत्महत्या की है, जो इस शहर की शिक्षा प्रणाली में गहरी चिंता का विषय है। यह समय है कि हम इस समस्या पर गंभीरता से विचार करें और छात्रों की काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य की देखरेख के लिए कदम उठाएं।