उत्तर प्रदेश के इस गांव ने दिए 10000 सैनिक, जहां पाकिस्तान को 1971 में चटा दी धूल!

भारतीय सेना के जांबाज सैनिक दुर्गम पहाड़ों पर हथियार लेकर आगे बढ़ रहे थे, जहां पाकिस्तान की चौकी से उनकी ओर गोलियां चलाई जा रही थीं। इसके बावजूद, भारतीय जवानों ने बिना रुके अपनी कार्रवाई जारी रखी। यह दृश्य उस ऐतिहासिक पल का था, जब भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के छंब जोड़िया बार्डर पर पाक अधिकृत चौकी पर कब्जा कर लिया था। यह जानकारी दी सूबेदार स्वरूप सिंह ने, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि उनकी रेजिमेंट में तीन लड़ाकू स्क्वाड्रन थे, जिसमें कुल 42 टैंक थे। इस दौरान घायल सैनिकों को बचाने का कार्य भी सैनिकों द्वारा किया गया।

सूबेदार स्वरूप सिंह ने बताया कि उन लोगों ने पहचाना था कि पाकिस्तान के पास जो पुल था, उसे पार करना बेहद आवश्यक था। यह पुल चिनाब नदी पर था, जिसने पहले अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था। भारतीय सेना ने इस पुल को तोड़ने की पाकिस्तानी सेना की कोशिशों के बावजूद सफलतापूर्वक पार किया और आगे बढ़ती गई। नेत्रित्व का काम कैप्टन और मेजर रैंक के अधिकारियों ने किया था, जिन्होंने पूरी रणनीति तैयार की थी। यह युद्ध 3 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ और 18 दिसंबर को पाकिस्तान की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया।

सूबेदार स्वरूप सिंह ने यह भी चर्चा की कि आज भी पाकिस्तान भारतीय सेना के सामने नहीं टिक सकता। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेना में भर्ती होना उनके लिए गर्व की बात थी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस को बनाए रखा और गांव में भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बने। उनका परिवार पहले से सैन्य परंपरा में था, जिसके कारण उन्हें सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिली।

सैदपुर गांव के कुंवरपाल सिंह ने भी 1971 के युद्ध में शामिल होने के अपने अनुभव साझा किए। उन्हें गर्व था कि उन्होंने बर्फीली पहाड़ियों पर चढ़ते हुए दुश्मनों का सामना किया। उनका मानना है कि भारतीय सेना की ताकत व रणनीति के कारण युद्ध को केवल 13 दिनों में जीत लिया गया। कुंवरपाल सिंह ने बताया कि वे 28 साल तक सेना में सेवा देते रहे और उन्हें युद्ध में दुश्मनों को नष्ट करने का अवसर मिला।

सैदपुर गांव की विशेषता ये है कि यहां से काफी संख्या में युवा सेना में भर्ती हुए हैं। इस गांव ने भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल में लगभग 10,000 जवानों का योगदान दिया है। वर्तमान में लगभग 3100 जवान सेवा में हैं।

अंत में, भारत ने हाल ही में पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ एयर स्ट्राइक की है, जो कि एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। इस ऑपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया, जो उन महिलाओं को समर्पित है, जिनके पतियों की आतंकवादियों ने हत्या की थी। भारत और पाकिस्तान के बीच कई बड़े युद्ध और संघर्ष हो चुके हैं, लेकिन भारतीय सेना की शक्ति और साहस हमेशा मजबूती से खड़ा रहता है।