इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा एक जमानत याचिका को 27 बार टालने पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। यह मामला एक ठगी केस से जुड़ा है जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का पूर्व उल्लंघन मानते हुए आरोपी लक्ष्य तंवर को जमानत प्रदान की। इस संबंध में Chief Justice of India (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच का कहना था कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला हो और वह चार साल से जेल में हो, तब कोर्ट को मामले को लटकाए नहीं रखना चाहिए।
लक्ष्य तंवर के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं। इसके अलावा, एंटी करप्शन एक्ट की धाराएं 13(1)(d) और 13(2) भी उन पर लागू की गई हैं। लक्ष्य तंवर का वकील राजा चौधरी ने कोर्ट में कहा कि उनका मुवक्किल अब तक तीन साल, आठ महीने और 24 दिन से जेल में है। अदालत ने यह भी बताया कि आज (22 मई) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन 20 मार्च को उस पर सुनवाई टाल दी गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जल्दी से जल्दी मुकदमे की कार्यवाही पूरी करे, जिसके बाद जमानत याचिका पर दोबारा विचार होगा।
CBI द्वारा जमानत याचिका का विरोध किया गया। CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने कहा कि आरोपी पर 33 मामलों में आरोप हैं। इस पर वकील राजा चौधरी ने जवाब दिया कि इनमें से 27 मामले गिरफ्तारी के बाद दर्ज हुए हैं और इनमें भी उन्हें जमानत मिल चुकी है। जब कोर्ट ने पूछा कि कितने गवाहों की गवाही हो चुकी है, तो चौधरी ने जानकारी दी कि कुल 365 गवाहों में से केवल 3 की गवाही हुई है। जस्टिस गवई ने यह प्रश्न किया कि अगर आरोपी चार साल से जेल में है और हाईकोर्ट 27 बार सुनवाई को टाल चुका है, तो 28वीं बार क्या उम्मीद की जा सकती है।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता व्यक्त की गई है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 82,831 मामले लंबित हैं, जो कि अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इनमें से अकेले 27,604 मामले पिछले एक साल में दर्ज किए गए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 38,995 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 37,158 मामलों का निपटारा हुआ है। पिछले 10 वर्षों में 8 बार पेंडिंग मामलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।
उल्लेखनीय है कि अब देश के विभिन्न कोर्ट्स, जिसमें सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट शामिल हैं, में कुल मिलाकर 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। इस स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से नई अदालतों की स्थापना के संबंध में जवाब मांगा है। इसके साथ ही, सरकार को अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक फंड की व्यवस्था करने पर ध्यान देने की आवश्यकता को भी बल दिया गया है। अदालतों की कार्यवाही में चालाकी और निकास का अभाव न्यायिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता का संकेत देता है।