लखनऊ पहुंचा मरीज वेंटिलेटर के बिना, निजी अस्पतालों के दलालों ने बनाया निशाना!

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (KGMU) में एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जहां एम्स से भेजे गए एक मरीज को वेंटिलेटर नहीं मिल सका। यह घटना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को दर्शाती है, बल्कि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की भी ओर इशारा करती है। बलरामपुर जिले के उतरौला निवासी वजहुल कमर, जिन्हें सिर पर कुल्हाड़ी से चोट लगी थी, को उनकी परिवारिक सदस्य सुबह चार बजे गोरखपुर एम्स की इमरजेंसी में लाई गई। यहां डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताते हुए वेंटिलेटर की आवश्यकता बताई और तुरंत उन्हें KGMU रेफर कर दिया।

जब परिवारजन KGMU पहुंचे, तो वहां भी डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की कमी की बात कही। उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर खाली नहीं है, जिससे मरीज के परिजनों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वे अस्पताल के विभिन्न विभागों में वेंटिलेटर की तलाश में भटकते रहे, लेकिन कुछ नहीं मिला। ऐसे में, अस्पताल में सुरक्षा और इंतजाम की कमी की समस्या स्पष्ट दिखाई दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, दलालों ने मौके का फायदा उठाया और एंबुलेंस को घेर लिया। उन्होंने परिजनों को प्राइवेट अस्पताल में जल्दी वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का लालच दिया। इससे प्रभावित होकर परिजन अस्पताल की सुविधाओं से निराश होकर घायल को प्राइवेट अस्पताल ले जाने पर मजबूर हो गए। इस तरह की घटनाएं न केवल हालात को और अधिक गंभीर बनाती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि कैसे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

जीवनरक्षक उपकरणों की कमी और अस्पतालों में उपयुक्त व्यवस्था का न होना एक गंभीर चिंता का विषय है। KGMU में करीब 350 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, फिर भी कई मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। प्रशासनिक चुस्ती और व्यवस्था में खामी के कारण अक्सर मरीज और उनके परिजन अपनी जान जोखिम में डालते हैं। पिछले साल भी ऐसी एक घटना सामने आई थी, जिसमें निजी अस्पताल के आंत्रप्रेन्योर ने स्थिति का फायदा उठाते हुए गंभीर मरीज को भर्ती किया था। इसके बाद, मामला काफी बड़ा बन गया था।

KGMU प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने इस स्थिति को लेकर बताया कि ट्रॉमा यूनिट में मरीजों का अधिक दबाव है, जिससे वेंटिलेटर का खाली होना मुश्किल हो जाता है। इस कठिनाई को देखते हुए, प्रशासन को तुरंत आवश्यक उपाय करने की आवश्यकता है ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और किसी भी तरह की अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। ऐसे में स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि इस प्रकार की घटनाओं से मरीजों की जान को खतरा न हो।