पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मौसम बुधवार की शाम अचानक बदल गया, जिससे बेमौसमी बारिश और तेज हवाएं उड़ीं। मेरठ, संभल, अमरोहा, हापुड़, आगरा सहित 12 जिलों में बारिश हुई, जिसके कारण 6 जिलों में दर्दनाक हादसे हुए और 10 लोगों की जान चली गई। हताहतों में एक सिपाही भी शामिल है। नोएडा में तेज आंधी के साथ बारिश हुई, जिसमें हवा की गति लगभग 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई। इससे कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे हाईवे पर लगभग 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
मेरठ में आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि 50 से ज्यादा स्थानों पर पेड़, होर्डिंग और बिजली के खंभे गिर गए। बारिश के साथ ओलों के गिरने की भी सूचना है। नौचंदी मेले के दौरान भारी जलभराव हो गया, जिसके कारण झूले गिर गए। लिसाड़ी गेट क्षेत्र में एक कच्चा मकान भी ढह गया, जिसमें परिवार के कई सदस्य घायल हुए। हादसे के समय उस स्थान पर महिलाएं रोटी बना रही थीं। वहीं, दौड़ाला क्षेत्र में बाइक सवार पिता-पुत्र पर एक पेड़ गिर गया, जिससे पिता की मौत हो गई।
बिजनौर में भी हादसे की खबर आई, जहां अफजलगढ़ पुलिस थाने में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र कुमार की बाइक सड़क पर गिरे पेड़ से टकरा गई और उनकी जान चली गई। अलीगढ़ में आंधी से भुजपुरा पुलिस चौकी की दीवार भी गिर गई, जिससे नुकसान हुआ। बारिश और ओलावृष्टि ने बागपत में गन्ने और तरबूज की फसल को नुकसान पहुंचाया। सहारनपुर के देवबंद में बिजली गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई।
गाजियाबाद में धूल भरी आंधी का असर भी देखने को मिला, जिसकी गति करीब 30 किमी प्रति घंटा थी। हापुड़ रोड पर एक पेड़ गिरने से बाइक सवार व्यक्ति की मौत हो गई। दिल्ली बॉर्डर से सटे खोड़ा कॉलोनी में भी एक दीवार गिरने से एक महिला की जान गई। बदायूं में ट्रांसफार्मर की चिंगारी से कूड़े के ढेर में आग लग गई, जिससे चार गांवों में आग लग गई और राहत-बचाव का काम बाधित हो गया।
लखीमपुर खीरी में भी एक दीवार गिरने से एक पिता और उसकी 10 साल की बेटी की जान चली गई, जबकि श्रावस्ती और बलरामपुर में भी तेज हवा और बारिश के कारण हालात खराब हुए। कौशांबी में तेज आंधी के बाद बारिश ने कई पेड़ और बिजली के खंभे उखाड़ दिए, वहीं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन भी प्रभावित हुआ।
मौसम विज्ञान के विशेषज्ञ अतुल कुमार के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के चलते मौसम में यह बदलाव आया है। आगामी दिनों में फिर से तापमान बढ़ने की संभावना है। मानसून केरल में अगले चार से पांच दिनों में पहुंचने की उम्मीद है, जो 2009 के बाद से पहले पहुंचने वाला मानसून होगा। यह मौसम बदलाव पूर्वी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक बने रहने की संभावना को भी दर्शाता है।