भाजपा ने संगोष्ठी और प्रदर्शनी के जरिए किया लोकतंत्र पर हमले काे याद
पश्चिम सिंहभूम, 25 जून (हि.स.)। पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) भाजपा की जिला इकाई ने बुधवार को 1975 में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर चाईबासा स्थित भाजपा कार्यालय में विचार संगोष्ठी और चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान देश में हुए दमन, लोकतंत्र पर हमले और कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों को जनता के समक्ष उजागर करना था।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात था। यह केवल सत्ता का संकट नहीं था, बल्कि संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का खुलेआम हनन था। कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के माध्यम से देश को विभाजित करने का कार्य किया और आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों की आवाज दबाने का षड्यंत्र रचा।
पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदिरा गांधी ने सत्ता की लोभ में पूरे देश को एक खुली जेल में तब्दील कर दिया था। कांग्रेस की मानसिकता तब भी अलोकतांत्रिक थी और आज भी वही है।
प्रदेश उपाध्यक्ष बड कुंवर गागराई ने आदिवासी समाज के साथ कांग्रेस के व्यवहार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में जबरन नसबंदी, प्रेस सेंसरशिप और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं।
प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद ने आपातकाल को भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया और कहा कि उस समय हर विरोध को देशद्रोह करार देकर लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया।
जिला अध्यक्ष संजय पांडे ने कहा कि आपातकाल की स्मृति को जीवित रखना जरूरी है ताकि युवा पीढ़ी यह समझ सके कि कैसे लोकतंत्र को कुचला गया था। भाजपा का यह नैतिक दायित्व है कि वह समय-समय पर इस सच्चाई को लोगों तक पहुंचाती रहे।
कार्यक्रम के दौरान चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आपातकाल के दौर की घटनाओं, जनता के संघर्ष और दमनकारी नीतियों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया। मौके पर पार्टी नेताओं ने संकल्प लिया कि वे आपातकाल की स्मृति को हमेशा जीवित रखेंगे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे।
इस अवसर पर गीता बालमुचु, मनोज लिंयागी, हेमंत केसरी, रामानुज शर्मा, बबलू शर्मा राकेश, सन्नी पासवान, पवन शर्मा, चंद्र मोहन तियु, जयश्री बानरा, शंभू हाजरा, रानी बंदिया, सुखमती बिरुवा, रायमुनी कुन्टिया, रूपा दास, हेमंती निषाद सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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