सांस्कृतिक पहलुओं को अपने व्यवहार में लाएं युवा: गब्बर
पश्चिम सिंहभूम, 7 जून (हि.स.)। पश्चिम सिंहभूम जिला में शनिवार को आदिवासी “हो” समाज युवा महासभा की ओर से चाईबासा के हरिगुटू स्थित कला एवं संस्कृति भवन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे “हो” भाषा-भाषी विद्यार्थियों के लिए रखा गया था, जिसका उद्देश्य था कि विद्यार्थी नौकरी या व्यवसाय के बाद भी अपनी परंपरा, संस्कृति और पहचान को न भूलें।
महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महासभा के राष्ट्रीय धर्म सचिव सोमा जेराई के नेतृत्व में यह कोचिंग कार्यक्रम बीते पांच वर्षों से निरंतर चल रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को मगे-पर्व, बा पर्व, हेरो पर्व और जोमनामा पर्व सहित जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े परंपरागत रीति-रिवाजों की जानकारी दी जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ विद्यार्थी इन सांस्कृतिक पहलुओं को अपने व्यवहार में लाएं और गांव के अन्य युवाओं को भी इसके लिए प्रेरित करें।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि “हो” समाज की पहचान उसके रीति-रिवाज और जीवनशैली से होती है। उन्होंने कहा कि केवल पर्व-त्योहार ही नहीं, बल्कि जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े संस्कारों को व्यवहारिक जीवन में उतारना ही असली पहचान है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महासभा के माध्यम से आगे भी शैक्षणिक भ्रमण, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा तथा ऐतिहासिक स्थलों के विजिटिंग कार्यक्रम जारी रहेंगे।
इस अवसर पर जिला सचिव ओएबन हेम्ब्रम, सदर अनुमंडल सचिव अशीष तिरिया, पूर्व अनुमंडल सचिव सिकंदर तिरिया, सरिता लागुरी, बसंती पाड़ेया, शकुंतला गुईया, ननिका सिंकू, टाटाराम सामड, प्रमिला बिरूवा, यशवन्ती सिंकू और सुशीला सिंकू समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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