प्रधानमंत्री मोदी का हर अभियान बना जन आन्दोलन
डॉ.राजेश मिश्र
अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब गांधी जयंती पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत की तो किसी को अंदाजा न रहा होगा की यह अभियान जन आन्दोलन का रूप ले लेगा । स्वच्छता आन्दोलन के साथ देखते ही देखते तरह से राजनेता, अभिनेता, अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी व आमजन जुड़ गये वह अपने आप मे अद्वितीय ही रहा । अभियान पूरे देश में व्यापक असर तो दिखा ही साथ ही लोगों के दिलों-दिमाग में स्वच्छता के प्रति जागरुकता के प्रति अमिट छाप छोड़ गया । आज भी लोग सार्वजनिक व निजी स्थलों मे कचरा फेंकने, गंदगी करने के पहले सौ बार सोचते है । कोविड के समय स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता और जन सहयोग को मिशाल के रूप मे देश ने देखा है । सरकारी मदद इलाज के इतर जिस तरह से एक दूसरे की मदद के लिए लोग सामने आए और लाखो लोगों की जान सुरक्षित किए वह प्रधानमंत्री के आह्वान का ही नतीजा रहा है ।
मोदी सरकार ने 11 साल के कार्यकाल में कई उल्लेखनीय और अभूतपूर्व कार्य कर भारत को कई क्षेत्रो मे नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। शौचालय पी.एम. आवास निर्माण के बाद बड़ी उपलब्धियों मे यदि किसी को गिना जाअगा तो वह है आयुष्मान भारत योजना, जिसने 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया है। इस योजना ने 6 करोड़ से अधिक लोगो का इलाज कराकर उन्हे वित्तीय संकट से बचाया। देखा जाए तो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के लिये इलाज पर होने वाला खर्च कमर तोड़ने वाला होता है। गम्भीर बीमारी के समय तो कई ऐसे परिवार रहे जो खर्च न उठा पाने की स्थिति मे मरीज को अपने हाल पर छोड़ देते थे।
आयुष्मान भारत योजना ने अब सब कुछ आसान कर दिया है। सामान्य हो या असामान्य सभी तरह की बीमारियों की चिन्ता आयुष्मान भारत पर छोड़ी जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के बाद डिजिटल इण्डिया का कदम क्रान्तिकारी रहा है। डिजिटल इण्डिया ने यूपीआई के माध्यम से भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान का नेतृत्वकर्ता बनाया जिससे 2025 तक 1.3 ट्रिलियन मासिक लेन-देन दर्ज किए गए। मेक इन इण्डिया विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा दिया जिससे भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बना। जल जीवन मिशन ने 11.82 करोड़ ग्रामीण घरो को नल जल कनेक्शन प्रदान किया जिससे स्वच्छ पेयजल की पहुंच बढ़ी।
मोदी सरकार ने अपने ग्यारह वर्ष के कार्यकाल मे ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए हैं। अनुच्छेद 370 का हटाया जाना ऐसा निर्णय रहा जिसे देश मान चुका था की यह सम्भव नही है। ‘यह नहीं हो सकता’ की धारणा आम हो चुकी थी लोकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व मे यह धारणा टूट गई। अनुच्छेद 370 समाप्त हो गया और किसी तरह की चूं- चपड़ भी नही हुई। विपक्ष की यह आशंका भी निर्मूल साबित हुई की देश मे भू-चाल आ जाएगा।अनुच्छेद 370 के समाप्ति के बाद देश ने भी देखा की जब जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव हुए तो 58.46 फीसद तक मतदान हुआ। यह परिवर्तन एक साहसिक निर्णय का असर रहा है। इसी तरह तीन तलाक की प्रथा जो मानवता के लिए त्रासदी थी जिस पर वर्षों तक चुप्पी छायी रही। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी बात कही लेकिन कोई निर्णायक कदम नही उठाया गया। मोदी सरकार ने तीन तलाक को समाप्त कर यह साबित कर दिया कि वह महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब पता चलता है कि इस्लामिक देशों में तो तीन तलाक बहुत पहले ही समाप्त हो चुका है।
प्रधानमंत्री ने गरीबों के कल्याण की सार्थक योजना चलाई जिसका असर देखने को मिला है। गरीबी हटाओ केवल पुराने नारे तक सीमित नहीं रहा बल्कि गरीबों के कल्याण को साकार रूप दिया गया। आंकड़े बताते हैं की 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा के उपर उठ चुके है। नीति आयोग और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंचों द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकडे भी इसके गवाह है। भारत मे अत्यधिक गरीबी में 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत 80 करोड लोगो को प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं व चावल नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया जिसे बडी उपलब्धि के रूप में माना जा सकता है। पी.एम. आवास योजना ने भी गरीबों की ना की दशा बदली बल्कि खुशहाली की राह दिखाआ है। पी.एम. आवास योजना के 4 करोड़ पक्के मकान बनाए जा चुके है और अगले पांच वर्षों में 3 करोड और मकानों के निर्माण का संकल्प लिया गया है। यदि आज आप गांवों की यात्रा करें तो पहले जहां खपरैल व घासफूस के घर दिखते थे अब वहां पक्के मकान खड़े है। सड़क नेटवर्क क्षेत्र में पहले जो सड़कें अधूरी व टूटी-फूटी रहती थीं वह अब हाइवे मे बदल चुकी हैं। यह आज के आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का परिचायक है।
पुलवामा व हाल में हुए पहलगाम आतंकी हमले से सभी वाकिफ हैं। आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नेहवा – हवाई बातें नहीं की, बल्कि जो कहा वह करके दिखाया है। देश ने देखा कि किस तरह सेना ने घुस कर मारा। यह तभी संभव होता जब नेतृत्त मजबूत हाथो में हो, और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो। मोदी सरकार ने देश की आंतरिक और वाह्य सुरक्षा फोकस करते हुए नक्सलवाद व आतंकवाद की कमर तोड़ने का काम किया है। पहले देश में 126 जिले नक्सल प्रभावित माने जाते थे जो अब घटकर 18 रह गए हैं। हिंसा मे 53 फीसद की कमी आई है। सुरक्षाबलों की हताहत संख्या में 72 फीद गिरावट दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अब नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ रहा है।
संसदीय क्षेत्र सीधी के संदर्भ मेंः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्यारह वर्ष के कार्यकाल मे संसदीय क्षेत्र सीधी में एतिहासिक कार्य हुए हैं। ललितपुर- सिंगरौली रेल परियोजना की आधारशिला 1985 मे रखी गई। बाद में परियोजना को ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया। केन्द्र मे कांग्रेस की सरकार होने और स्थानीय स्तर पर मजबूत व पहुंचवाले नेताओं के होने के बावजूद परियोजना को गतिमान बनाने एक धेला भी नही दिया गया। रेल परियोजना को गति देने का काम नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद हुआ है। ग्यारह वर्ष के प्रयास का नतीजा रहा की रीवा से सीधी और सिंगरौली तक रेल लाइन बिछाने का काम तेज है। जगह – जगह स्टेशन, पुल आदि का कार्य तेजी से हो रहा है। बघवार तक तो पिछले महीने ट्रायल मे रेल आ चुकी है। जिला मुख्यालय मे भी शीघ्र बहुप्रतीक्षित रेल पहुंचने वाली है। पिछले 40 वर्ष से ठप पड़ी रेल परियोजना को जहां मोदी सरकार ने सजीव कर दिखाया वहीं सीधी – रीवा मार्ग पर कैमोर पहाड़ मे विश्वस्तरीय सुरंग का निर्माण कराकर समूचे विंध्य को बड़ी सौगात दी है। सुरंग बन जाने से सीधी और रीवा के बीच आवागमन सुगम व रोमांचित हो गया है । संसदीय क्षेत्र मे इसके अलावा बेहतरीन नेशनल हाइवे निर्माणाधीन हैं। गांव – देहात भी सड़क, पेयजल, बिजली की सुविधा से युक्त हो गए हैं। सीधी – सिंगरौली में मेडिकल कालेज की स्थापना, इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक संस्थानों की स्थापना ने शिक्षा के क्षेत्र को मजबूती प्रदान की है। साथ ही सिंचाई परियोजना की शुरुआत आदि ने किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने का काम किया है।
(लेखक, मध्य प्रदेश के सीधी से सांसद हैं।)
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