मंत्री ने की हथकरघा छात्रों के प्रशिक्षण के लिए पांच गुना स्टाइपेंड बढ़ाने की घोषणा
नई दिल्ली, 1 जून (हि.स.)। दिल्ली सरकार के इंडस्ट्रीज विभाग ने उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देश पर हथकरघा छात्रों के प्रशिक्षण के लिए पांच गुना स्टाइपेंड बढ़ाने की घोषणा रविवार को की है। उद्योग मंत्री ने इसे युवाओं और हेरिटेज में रणनीतिक और आवश्यक निवेश बताया है।
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देशानुसार पारंपरिक हैंडलूम के क्षेत्र में युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक प्रमुख नीति प्रस्ताव में बदलाव किया गया है। दिल्ली सरकार ने ‘हथकरघा संवर्धन’ योजना के तहत इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हैंडलूम टेक्नोलॉजी, जोधपुर में हथकरघा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता में उचित वृद्धि की सिफारिश की है।
प्रस्ताव में छात्र सहायता के दो प्रमुख घटकों में वृद्धि की गई है : एडिशनल स्टेट स्टाइपेंड के तहत पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों के प्रशिक्षण के लिए मौजूदा 400 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव है। दूसरे शैक्षिक पुस्तक/भ्रमण भत्ता : दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए प्रति वर्ष 1000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति छात्र करने का प्रस्ताव है। वित्तीय सहायता की बढ़ी हुई दरें शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू हो रही है। वर्तमान दरें 2009-10 से नहीं बढ़ाई गई हैं, लगभग 15 वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है तब से कोई संशोधन नहीं किया गया है। समय के साथ, अध्ययन सामग्री, तकनीकी पुस्तकों और टूर के माध्यम से शैक्षिक प्रदर्शन की लागत में काफी वृद्धि हुई है। इससे यह वृद्धि आवश्यक हो गई है।
मंत्री सिरसा ने कहा कि यह हमारे युवाओं और भारतीय हथकरघा की प्राचीन विरासत में एक रणनीतिक निवेश है। यह केवल वित्तीय सहायता में वृद्धि नहीं है, बल्कि हमारे भविष्य के कारीगरों की नींव को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एडिशनल स्टाइपेंड व पुस्तक एवं शैक्षणिक भ्रमण भत्तों की दरों में संशोधन के लिए प्रस्तावित वृद्धि जरूरी है क्योंकि वर्तमान दरें अब छात्रों द्वारा वहन की जाने वाली वास्तविक लागतों को प्रतिबिंबित नहीं करतीं। यह प्रस्ताव मुद्रास्फीति तथा शिक्षा से संबंधित खर्चों में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इससे स्टाइपेंड की प्रभावशीलता और प्रासंगिकता सुनिश्चित की जा सके।
वित्तीय वर्ष 2025–2026 के लिए इस योजना के अंतर्गत कुल 10 लाख रुपये का बजटीय प्रावधान निर्धारित किया गया है, ताकि संशोधित दरों के अनुरूप व्यय का वहन किया जा सके।
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